1 Nov 2026, Sun
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दिल्ली में महिला वकील पर पति का जानलेवा हमला, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, कहा- दोषी बचना नहीं चाहिए

दिल्ली महिला वकील पर चाकू हमले का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, अस्पतालों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली: दिल्ली के कड़कड़डूमा इलाके में एक महिला वकील पर हुए जानलेवा चाकू हमले के मामले ने देश की न्याय व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना पर Supreme Court of India ने स्वत: संज्ञान लेते हुए तत्काल सुनवाई शुरू की।

सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत को बताया कि उनके पति ने उन पर बेरहमी से चाकू से हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें तुरंत उचित इलाज नहीं मिल सका। पीड़िता ने बताया कि वह पहले तीन अलग-अलग अस्पतालों में गईं, लेकिन गंभीर हालत के बावजूद उन्हें भर्ती नहीं किया गया। बाद में उन्हें All India Institute of Medical Sciences में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज शुरू हुआ।

पीड़िता के अनुसार, हमले के तुरंत बाद उन्होंने PCR को सूचना दी और अपने भाई को भी बुलाया। इस दौरान उनके ससुराल पक्ष के लोग मौके से फरार हो गए। अस्पतालों द्वारा इलाज में देरी को लेकर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया और सवाल किया कि आखिर एक गंभीर घायल महिला को आपात स्थिति में भी इलाज क्यों नहीं मिला।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा देना अनिवार्य होने के बावजूद इसे क्यों नजरअंदाज किया गया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर खामी को भी दर्शाता है।

सरकारी पक्ष की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है और जांच जारी है।

कोर्ट ने यह भी पाया कि पीड़िता की तीन नाबालिग बेटियां हैं, जिनमें से एक को आरोपी पति ने घर के बाहर छोड़ दिया था, जबकि दो अन्य बच्चों को ससुराल पक्ष अपने साथ ले गया। अदालत ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और पुलिस को तुरंत सभी बच्चों का पता लगाने के निर्देश दिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और इसे किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपा जाए। साथ ही सुझाव दिया गया कि जांच किसी महिला अधिकारी (ACP या DCP स्तर) के नेतृत्व में कराई जाए, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़िता को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) को आदेश दिया गया है कि वह पीड़िता को अंतरिम वित्तीय मदद उपलब्ध कराए, ताकि वह इलाज और बच्चों की देखभाल कर सके।

अदालत ने पीड़िता की हालत को देखते हुए उन्हें “बहादुर महिला” बताया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट वूमेन लॉयर्स एसोसिएशन ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है।

फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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