सोशल मीडिया पर इन दिनों बेंगलुरु में आयोजित एक अनोखी प्रतियोगिता खूब चर्चा बटोर रही है। इस मुकाबले में शहर के सबसे भारी-भरकम और प्यारे कुत्तों को लेकर लोगों के बीच वोटिंग कराई जा रही है। प्रतियोगिता की शुरुआत 64 कुत्तों के साथ हुई थी, लेकिन कई राउंड और ऑनलाइन वोटिंग के बाद अब केवल दो फाइनलिस्ट बचे हैं। इनमें गूफी और बाचोंकर मैकचोंकेथ शामिल हैं। दोनों कुत्तों को स्थानीय लोग प्यार से जानते हैं और अब सोशल मीडिया पर उनके समर्थक अपने पसंदीदा प्रतियोगी को जिताने के लिए अभियान चला रहे हैं।
यह अनोखा मुकाबला सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए शहर के सामुदायिक और स्ट्रीट डॉग्स के प्रति लोगों का लगाव भी सामने आ रहा है।
64 कुत्तों से शुरू हुआ मुकाबला
बेंगलुरु में यह प्रतियोगिता 1 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई थी। इसमें शुरुआती तौर पर 64 कुत्तों को शामिल किया गया। प्रतियोगिता को नॉकआउट फॉर्मेट में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें ऑनलाइन वोटिंग के आधार पर अगले राउंड के लिए कुत्तों का चयन किया जाता है।
हर राउंड के साथ मुकाबला दिलचस्प होता गया और लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ती गई। अब फाइनल में पहुंचने वाले दोनों कुत्तों को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। समर्थक पोस्टर और तस्वीरें साझा कर रहे हैं और दूसरे लोगों से अपने पसंदीदा कुत्ते के लिए वोट करने की अपील कर रहे हैं।
कौन हैं फाइनल में पहुंचे दोनों कुत्ते?
फाइनल में पहुंचा पहला कुत्ता गूफी है, जो काले रंग का है। उसे बेंगलुरु के एचएसआर इलाके से नामांकित किया गया था। उसकी खास पहचान उसके जबड़े से बाहर दिखाई देने वाले दांत हैं, जो उसे दूसरे कुत्तों से अलग बनाते हैं।
वहीं, दूसरे फाइनलिस्ट का नाम बाचोंकर मैकचोंकेथ है। हल्के रंग और फूले हुए शरीर वाला यह कुत्ता देखने में बुल जैसा लगता है। इसकी तस्वीरें इंदिरानगर के आसपास की बताई गई हैं। दोनों कुत्ते स्थानीय समुदाय से जुड़े हैं और आसपास के लोग उन्हें प्यार से नाम देकर पहचानते हैं।
वोटिंग के लिए सोशल मीडिया पर अभियान
इस प्रतियोगिता में वोटिंग को लेकर लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा है। समर्थक अपने पसंदीदा कुत्ते की तस्वीरें साझा कर रहे हैं और उसे विजेता बनाने के लिए प्रचार कर रहे हैं। कई पोस्ट देखकर ऐसा लग रहा है, जैसे किसी चुनाव में उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया जा रहा हो।
फाइनल राउंड की वोटिंग 16 अक्टूबर 2026 को भारतीय समयानुसार रात 8 बजे शुरू हुई। लोगों के लिए सोशल मीडिया पेज और प्रतियोगिता की वेबसाइट के जरिए वोट करने की व्यवस्था की गई है। इस पहल को स्थानीय पशु कल्याण समूहों और कुछ तकनीकी कंपनियों का भी सहयोग मिला है।
दिल्ली से शुरू हुआ था यह ट्रेंड
भारी-भरकम कुत्तों की ऐसी प्रतियोगिताओं का चलन पहले दिल्ली में भी देखने को मिला था। वहां 64 कुत्तों के साथ शुरू हुए मुकाबले ने सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रियता हासिल की। इसके बाद दूसरे शहरों में भी इसी तरह की प्रतियोगिताओं को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी।
हालांकि, आयोजक इस बात पर भी जोर देते हैं कि प्रतियोगिता का उद्देश्य कुत्तों के मोटापे को बढ़ावा देना नहीं है। पालतू और सामुदायिक कुत्तों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। जरूरत से ज्यादा वजन उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
फिलहाल बेंगलुरु के इस मुकाबले में लोगों की नजरें गूफी और बाचोंकर मैकचोंकेथ पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि ऑनलाइन वोटिंग में किसे सबसे ज्यादा समर्थन मिलता है और कौन इस अनोखी प्रतियोगिता का विजेता बनता है।

