12 Jun 2026, Fri

टेक ऑफ के 32 सेकंड बाद फ्यूल स्विच बंद, AI-171 क्रैश में पायलट की गलती या टेक्निकल फॉल्ट? एक साल बाद भी अनसुलझा सवाल

अहमदाबाद, 12 जून 2026: भारत के सबसे भीषण विमान हादसों में से एक माने जाने वाले एयर इंडिया विमान दुर्घटना को आज एक वर्ष पूरा हो गया। 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर टेक-ऑफ के कुछ ही सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जान गंवाई थी। कुल मिलाकर इस दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हुई थी।

विमान अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के मात्र 32 सेकंड बाद शहर के एक मेडिकल कॉलेज परिसर में जा गिरा था। हादसा इतना भयावह था कि विमान पूरी तरह तबाह हो गया। इस दुर्घटना में भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश एकमात्र यात्री थे, जो जीवित बचने में सफल रहे।

एक साल बाद भी इस दुर्घटना की वास्तविक वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच एजेंसियां, विमानन विशेषज्ञ और पीड़ित परिवार अब भी उस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि आखिर आधुनिक तकनीक से लैस बोइंग 787 ड्रीमलाइनर इतनी जल्दी नियंत्रण कैसे खो बैठा।

जुलाई 2025 में भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण खुलासे हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, टेक-ऑफ के कुछ ही सेकंड बाद विमान के दोनों इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच “RUN” से “CUTOFF” मोड में चले गए थे। इसके कारण इंजनों को ईंधन की आपूर्ति बंद हो गई और विमान का थ्रस्ट तेजी से कम होने लगा।

जांच में यह भी सामने आया कि पायलटों ने बाद में स्विच को दोबारा “RUN” स्थिति में लाकर इंजनों को पुनः चालू करने का प्रयास किया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। विमान के पास पर्याप्त ऊंचाई और समय नहीं बचा था, जिससे वह सुरक्षित रूप से संभल नहीं सका।

कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से मिली जानकारी ने जांच को और अधिक जटिल बना दिया। रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है, “आपने फ्यूल क्यों काटा?” जवाब में दूसरा पायलट कहता है, “मैंने ऐसा नहीं किया।” इस बातचीत ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह मानवीय भूल थी, तकनीकी खराबी थी या फिर किसी सिस्टम की विफलता? फिलहाल इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है।

जांचकर्ताओं को अब तक बोइंग 787 विमान या उसके GE एयरोस्पेस इंजनों में किसी बड़ी तकनीकी खराबी का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि अंतिम जांच रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार इंजनों और अन्य तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच जारी है, जिसके कारण रिपोर्ट में देरी हो रही है।

हादसे के एक साल बाद भी पीड़ित परिवार न्याय और जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। देश की सबसे चर्चित विमान दुर्घटनाओं में शामिल यह हादसा आज भी कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है, जिनका जवाब अंतिम जांच रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद की जा रही है।

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