नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने देश के करोड़ों युवाओं का भरोसा तोड़ा है और सरकार इस समस्या को रोकने में विफल रही है। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया और कहा कि मौजूदा सरकार छात्रों की आवाज सुनती है तथा समस्याओं के समाधान के लिए कानून लेकर आई है।
पेपर लीक पर सरकार को घेरा
लोकसभा में चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था जैसे किसी बड़े संकट से राहत मिल गई हो। उन्होंने कहा कि एक मंत्री को बदलकर सरकार ने असल जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की है।
अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की लगातार कोशिश हुई है। उनके अनुसार, स्कूलों, विश्वविद्यालयों और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) समेत कई परीक्षाओं में सामने आए विवादों ने छात्रों और उनके परिवारों को एकजुट कर दिया, जिसके कारण सरकार पर दबाव बढ़ा।
यूपी में कई पेपर लीक का मुद्दा उठाया
सपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए दावा किया कि राज्य में 20 से अधिक भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए। उन्होंने कहा कि जब युवाओं की मेहनत बार-बार बेकार होती है तो उनके भीतर स्वाभाविक रूप से आक्रोश पैदा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत साफ नहीं है और जब तक पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं होगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसी व्यवस्थाओं में भी पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं कर पा रही है तो परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के उसके दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
किरेन रिजिजू का पलटवार
अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह तय करना होगा कि कौन-सी स्थिति बेहतर है—वह सरकार जो छात्रों के विरोध को सुनते हुए संसद में कानून लेकर आए या वह सरकार जो विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए आपातकाल जैसी स्थिति लागू कर दे।
रिजिजू ने कहा कि वर्तमान सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि भविष्य में भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से आयोजित हो सकें।
इमरजेंसी पर भी हुई बहस
केंद्रीय मंत्री के बयान पर जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने खुद इमरजेंसी का दौर नहीं देखा, लेकिन उसकी झलक आज भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा कानून बनाने का नहीं, बल्कि उसे ईमानदारी से लागू करने का है। उनके अनुसार, यदि सरकार की नीयत पारदर्शी होगी तो परीक्षा प्रक्रिया अपने आप निष्पक्ष बन जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जैसे इमरजेंसी के बाद देश में राजनीतिक बदलाव आया था, वैसे ही जनता भविष्य में भी बदलाव का फैसला कर सकती है।
युवाओं और परीक्षा प्रणाली पर केंद्रित रही बहस
लोकसभा में हुई इस चर्चा का मुख्य केंद्र युवाओं का भविष्य, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक की बढ़ती घटनाएं रहीं। सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। वहीं विपक्ष का आरोप है कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से लागू करना और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करना भी जरूरी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विधेयक पर संसद में और विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

