22 Jun 2026, Mon

जब हमारी रक्षा की बारी आती, तो वे हमारे साथ खड़े नहीं होते, यह अच्छी बात नहीं’, डोनाल्ड ट्रंप ने मेलोनी को फिर सुनाया

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका और इटली के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में नई खटास देखने को मिल रही है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इटली की प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका वर्षों से अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता आया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उसे समान सहयोग नहीं मिल पाता।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इटली के रुख पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने लंबे समय तक नाटो सहयोगियों की सुरक्षा पर भारी संसाधन खर्च किए हैं, लेकिन कुछ देशों ने ईरान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर अपेक्षित समर्थन नहीं दिया। बयान में विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियों का उल्लेख किया गया।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान को लेकर अमेरिका की नीति वैश्विक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं। दूसरी ओर, कई यूरोपीय देश सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं।

दोनों नेताओं के बीच यह पहली बार नहीं है जब सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आए हों। इससे पहले भी हाल ही में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच कथित तौर पर मतभेद की खबरें सामने आई थीं। उस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि इटली की प्रधानमंत्री ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने का कई बार अनुरोध किया था। हालांकि, इटली की ओर से इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया और उन्हें “मनगढ़ंत” बताया गया।

विवाद बढ़ने के बाद इटली की प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि उनका देश अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि इटली किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अपने सिद्धांतों और रणनीतिक हितों के आधार पर निर्णय लेता है।

इसी बीच, इटली के विदेश मंत्री ने भी अमेरिकी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और उन्हें अनुचित बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विवाद के चलते प्रस्तावित राजनयिक कार्यक्रमों पर भी असर पड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इटली के बीच बढ़ती बयानबाजी का असर व्यापक अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। दोनों देश नाटो के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और यूरोप की सुरक्षा संरचना में उनकी अहम भूमिका है। ऐसे में यदि मतभेद लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो इससे पश्चिमी देशों की एकजुटता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि सार्वजनिक बयानबाजी के बावजूद दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सुरक्षा संबंध मजबूत बने रहेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्ष अपने मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।

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