महाराष्ट्र में 1 मई से ऑटो-रिक्शा वेरिफिकेशन अभियान, मराठी भाषा नियम को लेकर सख्ती बढ़ी
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में ऑटो-रिक्शा चालकों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनायक ने घोषणा की है कि 1 मई से पूरे राज्य में एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके तहत सभी ऑटो-रिक्शा चालकों के दस्तावेजों की जांच और वेरिफिकेशन किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की अनियमितता पर रोक लगाना है।
1 मई से शुरू होगा सख्त वेरिफिकेशन अभियान
परिवहन मंत्री के अनुसार, इस अभियान के दौरान सभी ऑटो-रिक्शा चालकों के लाइसेंस, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। अगर किसी भी चालक के दस्तावेजों में जरा सी भी गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने साफ कर दिया है कि यह अभियान सिर्फ औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि इसे गंभीरता से लागू किया जाएगा।
मराठी भाषा सीखने के लिए दिया गया समय
इस मुद्दे के साथ ही राज्य में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्यता को लेकर भी चर्चा तेज है। सरकार ने इस मामले में फिलहाल राहत देते हुए चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए समय दिया है।
इसके तहत 1 मई से 15 अगस्त तक का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें चालकों को आरटीओ और अन्य संस्थानों के माध्यम से मराठी भाषा सिखाई जाएगी। इस अवधि के दौरान सरकार उन्हें भाषा प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगी ताकि वे स्थानीय लोगों से बेहतर संवाद कर सकें।
15 अगस्त के बाद आगे का फैसला
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 15 अगस्त के बाद इस अवधि को बढ़ाया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय स्थिति और जरूरत के अनुसार लिया जाएगा। हालांकि, यह तय है कि 1 मई से वेरिफिकेशन अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
संजय राउत का बयान
इस मामले पर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में स्थानीय भाषा को लेकर नियम पहले से लागू हैं।
राउत ने उदाहरण देते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल में बंगाली, गुजरात में गुजराती, कर्नाटक में कन्नड़ और पंजाब में पंजाबी अनिवार्य है, तो महाराष्ट्र में मराठी को लेकर आपत्ति क्यों होनी चाहिए?”
उन्होंने आगे कहा कि मराठी भाषा को अनिवार्य बनाना किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों और चालकों दोनों के हित में है। उनके अनुसार, स्थानीय भाषा जानने से ड्राइवरों को काम में आसानी होगी और यात्रियों से बेहतर संवाद स्थापित हो सकेगा।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार का यह कदम जहां एक तरफ नियमों को सख्त बनाने की दिशा में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मराठी भाषा को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में रह सकता है, खासकर जब 1 मई से वेरिफिकेशन अभियान शुरू होगा।

