मुंबई। साउथ सुपरस्टार पृथ्वीराज सुकुमारन की बहुप्रतीक्षित एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘खलीफा’ 20 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं अब सामने आने लगी हैं। शुरुआती रिव्यू में फिल्म को मिला-जुला रिस्पॉन्स मिलता नजर आ रहा है। जहां दर्शकों ने पृथ्वीराज सुकुमारन की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस, फिटनेस, स्टाइल और एक्शन सीन्स की जमकर तारीफ की है, वहीं कमजोर कहानी, साधारण लेखन और भावनात्मक जुड़ाव की कमी को लेकर फिल्म की आलोचना भी हो रही है।
फिल्म का निर्देशन वैशाख ने किया है। इसमें पृथ्वीराज सुकुमारन के साथ नील नितिन मुकेश और मालविका शर्मा अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा फिल्म में मोहनलाल का कैमियो भी है, जिसे लेकर रिलीज से पहले दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता थी। हालांकि, शुरुआती प्रतिक्रियाओं के मुताबिक यह कैमियो दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया।
पृथ्वीराज की स्क्रीन प्रेजेंस बनी फिल्म की ताकत
फिल्म देखने वाले कई दर्शकों ने पृथ्वीराज सुकुमारन के लुक, फिटनेस और स्क्रीन प्रेजेंस को इसकी सबसे बड़ी खूबियों में शामिल किया है। एक्शन दृश्यों में उनका अंदाज और बॉडी लैंग्वेज दर्शकों को प्रभावित करती है। फिल्म के कुछ एक्शन ब्लॉक्स को भी काफी दमदार बताया जा रहा है।
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी कई जगह माहौल को बेहतर बनाने में कामयाब रहता है। खासतौर पर एक्शन सीन्स के दौरान संगीत और विजुअल्स का तालमेल प्रभाव पैदा करता है। हालांकि, कुछ दर्शकों का मानना है कि म्यूजिक का प्रभाव पूरी फिल्म में एक जैसा नहीं बना रहता।
कमजोर पटकथा ने बिगाड़ा अनुभव
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी कहानी और पटकथा को बताया जा रहा है। दर्शकों के एक वर्ग का कहना है कि फिल्म का स्केल बड़ा है, लेकिन इसकी मुख्य कहानी उतनी मजबूत नहीं है। कहानी कई जगह अपने मूल ट्रैक से भटकती हुई महसूस होती है और फिल्म को आगे बढ़ाने के लिए कई ऐसे मोड़ इस्तेमाल किए गए हैं, जो दर्शकों को पहले से अनुमानित लग सकते हैं।
कुछ दर्शकों ने फिल्म की कहानी को पुरानी स्मगलिंग और बदले की कहानियों जैसा बताया है। उनके मुताबिक फिल्म में नया संघर्ष या ऐसा ट्विस्ट नहीं है, जो इसे इसी तरह की दूसरी फिल्मों से अलग कर सके।
शुरुआती हिस्से की रफ्तार पर भी सवाल
फिल्म की गति को लेकर भी दर्शकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ दर्शकों के अनुसार फिल्म को अपनी मुख्य कहानी पर आने में काफी समय लगता है। शुरुआती करीब 40 मिनट कई लोगों को धीमे और खिंचे हुए महसूस हुए। हालांकि, इंटरवल के आसपास फिल्म की रफ्तार बेहतर होने की बात कही जा रही है।
किरदारों के साथ भावनात्मक जुड़ाव की कमी भी फिल्म की एक बड़ी कमजोरी मानी जा रही है। दर्शकों का कहना है कि कहानी में बड़े घटनाक्रम तो हैं, लेकिन किरदारों की भावनाओं को पर्याप्त गहराई नहीं मिल पाती।
कैमियो भी नहीं छोड़ पाया खास असर
मोहनलाल के कैमियो को लेकर रिलीज से पहले काफी उम्मीदें थीं, लेकिन शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाओं के मुताबिक यह हिस्सा कहानी का स्वाभाविक हिस्सा कम और फैन-सर्विस ज्यादा महसूस हुआ। वहीं नील नितिन मुकेश के किरदार को भी कुछ दर्शकों ने उम्मीद के मुताबिक प्रभावशाली नहीं माना।
कुल मिलाकर, ‘खलीफा’ उन दर्शकों को पसंद आ सकती है जिन्हें बड़े पर्दे पर स्टाइलिश एक्शन, दमदार लुक और स्टार पावर पसंद है। हालांकि, अगर दर्शक मजबूत कहानी, प्रभावी लेखन और गहरा भावनात्मक जुड़ाव चाहते हैं, तो फिल्म उन्हें निराश कर सकती है। शुरुआती प्रतिक्रियाओं के आधार पर फिल्म को फिलहाल एक मिला-जुला रिस्पॉन्स मिलता दिखाई दे रहा है।

