लंदन: जम्मू-कश्मीर को लेकर ब्रिटेन की संसद में पेश एक प्रस्ताव चर्चा में है। इसमें जम्मू-कश्मीर पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया गया है। साथ ही, क्षेत्र में आतंकवादी घटनाओं, आम नागरिकों की मौत और कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर चिंता जताई गई है। प्रस्ताव में आतंकवाद से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को भी रेखांकित किया गया है।
यह प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की वर्षगांठ से पहले पेश किया गया है। इसमें ऐतिहासिक घटनाओं, क्षेत्र की सुरक्षा और आतंकवाद के आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख किया गया है।
26 अक्टूबर 1947 के ऐतिहासिक विलय का उल्लेख
ब्रिटिश संसद में पेश प्रस्ताव का नाम ‘जम्मू-कश्मीर विलय दिवस’ रखा गया है। इसमें 26 अक्टूबर 1947 की तारीख का उल्लेख किया गया है, जब तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के दस्तावेज यानी ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर किए थे।
प्रस्ताव में इस दिन को उन लोगों और समुदायों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है, जो जम्मू-कश्मीर के भारत में संवैधानिक विलय की वर्षगांठ मनाते हैं। यह ऐतिहासिक घटना जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ संबंधों के संदर्भ में अहम स्थान रखती है।
इस प्रस्ताव के जरिए जम्मू-कश्मीर की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर समर्थन व्यक्त किया गया है। इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया है।
आतंकवादी घटनाओं में नागरिकों की मौत पर चिंता
प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं के दौरान मारे गए और घायल हुए आम नागरिकों के प्रति संवेदना जताई गई है। इसमें कहा गया है कि आतंकवाद का असर केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सुरक्षा बलों के जवान भी इन घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं।
प्रस्ताव में क्षेत्र में आतंकवाद के लगातार बने रहने और उससे प्रभावित लोगों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है। इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकवाद से प्रभावित लोगों का भी जिक्र किया गया है।
इस मुद्दे को उठाते हुए आतंकवादी हिंसा के कारण परिवारों और स्थानीय समुदायों को होने वाले नुकसान की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। प्रस्ताव में नागरिकों की सुरक्षा को एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा गया है।
कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल
प्रस्ताव में कश्मीरी पंडित समुदाय को निशाना बनाकर की गई हत्याओं का उल्लेख करते हुए उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि समुदाय के लोगों के सामने आतंकवाद और डराने-धमकाने से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और उनके साथ हुई हिंसक घटनाओं का मुद्दा लंबे समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा रहा है। प्रस्ताव में इस समुदाय की स्थिति को भी प्रमुखता दी गई है।
इसके अतिरिक्त, प्रस्ताव में भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत तथा रचनात्मक संबंधों के महत्व को स्वीकार किया गया है। इसमें ब्रिटेन में रहने वाले जम्मू-कश्मीर मूल के लोगों और समुदायों के योगदान की सराहना भी की गई है।
भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिहाज से अहम पहल
इस प्रस्ताव पर बॉब ब्लैकमैन, जिम शैनन और गिल फर्निस ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक विलय, आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं और भारत की क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन जैसे मुद्दों को एक साथ रखा गया है।
हालांकि, संसद में प्रस्ताव पेश किया जाना अपने आप में ब्रिटेन सरकार की आधिकारिक विदेश नीति में बदलाव का प्रमाण नहीं है। फिर भी, यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर को लेकर ब्रिटेन की संसदीय चर्चा में व्यक्त विचारों को सामने लाता है।

