भारतीय पहलवान अमन सहरावत ने पुरुषों की 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में उनका सामना उत्तर कोरिया के हान चोंग सोंग से हुआ। बेहद रोमांचक और उतार-चढ़ाव से भरे मुकाबले में अमन ने एक समय बड़ी बढ़त गंवाने के बाद जबरदस्त वापसी की और अंत में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।
फाइनल की शुरुआत में अमन सहरावत ने बेहद आत्मविश्वास और संयम के साथ मुकाबला किया। उन्होंने विपक्षी पहलवान के आक्रामक रवैये का प्रभावी ढंग से सामना किया और सही मौके का इंतजार करते हुए अंक जुटाने शुरू किए। पहले चरण में अमन की रणनीति काफी प्रभावी रही। उन्होंने मजबूत डिफेंस के साथ आक्रामक खेल का संतुलन बनाए रखा और देखते ही देखते 6-1 की बढ़त हासिल कर ली।
मुकाबले के इस चरण में अमन काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रहे थे। दूसरी ओर हान चोंग सोंग लगातार वापसी का प्रयास कर रहे थे। इसके बाद मुकाबले में अचानक बड़ा मोड़ आया। उत्तर कोरियाई पहलवान ने अपनी रणनीति बदली और अमन पर तेजी से हमले करने शुरू कर दिए। कुछ ही समय में उन्होंने लगातार अंक हासिल करते हुए भारतीय पहलवान की बढ़त को खत्म कर दिया।
हान ने एक के बाद एक दांव लगाकर छह अंक हासिल किए और स्कोर 6-7 कर दिया। अमन अब मुकाबले में पीछे हो चुके थे। इस स्थिति में उनके सामने गोल्ड मेडल बचाने की बड़ी चुनौती थी। मुकाबला पूरी तरह विपक्षी पहलवान के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा था, लेकिन अमन ने अपना धैर्य नहीं खोया।
अमन ने दबाव के बीच शानदार मानसिक मजबूती दिखाई और मुकाबले के निर्णायक क्षण में बेहतरीन दांव लगाया। उनके इस मूव से उन्हें एक साथ चार अंक हासिल हुए। इस दांव ने मुकाबले की दिशा ही बदल दी और अमन ने दोबारा बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद विपक्षी टीम की ओर से इस फैसले को चुनौती भी दी गई।
अंपायरों और अधिकारियों ने चुनौती की समीक्षा की, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। चुनौती असफल रहने के कारण अमन को एक अतिरिक्त अंक भी मिला। इससे उनकी स्थिति और मजबूत हो गई। मुकाबले के अंतिम क्षणों में अमन ने अपनी बढ़त को बरकरार रखा और आखिरकार स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे।
इस जीत के साथ अमन सहरावत ने भारतीय कुश्ती के लिए एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनकी जीत खास इसलिए भी रही क्योंकि उन्होंने मुकाबले के दौरान कई बार बदलती परिस्थितियों के बीच संयम बनाए रखा। शुरुआत में बढ़त बनाने के बाद पिछड़ने और फिर निर्णायक वापसी करने का उनका प्रदर्शन लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
इस प्रतियोगिता में भारतीय कुश्ती के लिए यह दूसरा गोल्ड मेडल भी है। अमन की इस सफलता ने भारतीय दल के पदक अभियान को और मजबूती दी है। फाइनल में उनकी शानदार वापसी ने यह साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, सही रणनीति और आखिरी क्षण तक संघर्ष करने की क्षमता मुकाबले का परिणाम बदल सकती है।

