3 Oct 2026, Sat

कभी नक्सलियों का ट्रेनिंग ग्राउंड था मैदान, अब गूंज रहे ‘भारत माता की जय’ के नारे

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में कभी नक्सल गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाले इलाकों की तस्वीर अब बदलती नजर आ रही है। आमाबेड़ा का वह मैदान, जहां कभी नक्सली प्रशिक्षण लिया करते थे, आज स्थानीय युवाओं की मेहनत और उनके भविष्य के सपनों का केंद्र बन गया है। यहां युवा सुबह-सुबह मैदान में पसीना बहाते हुए सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस की ओर से शुरू किए गए ‘मिशन रक्षक’ अभियान के तहत युवाओं को फिजिकल टेस्ट के साथ लिखित परीक्षा की तैयारी भी मुफ्त कराई जा रही है।

इस अभियान में कांकेर जिले के कई क्षेत्रों से युवक और युवतियां हिस्सा ले रहे हैं। बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण कराया है। खास बात यह है कि युवतियां भी इस तैयारी में पीछे नहीं हैं। वे नियमित रूप से मैदान में पहुंचकर दौड़, कूद और अन्य शारीरिक अभ्यास कर रही हैं। कई युवाओं का लक्ष्य पुलिस, अर्धसैनिक बल या अन्य सुरक्षा सेवाओं में भर्ती होकर सरकारी नौकरी हासिल करना है।

पांच स्थानों पर चल रहा प्रशिक्षण

‘मिशन रक्षक’ के तहत जिले में पांच प्रमुख स्थानों पर प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें आमाबेड़ा, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कोयलीबेड़ा और पखांजूर शामिल हैं। यहां उम्मीदवारों को भर्ती परीक्षाओं में होने वाले शारीरिक परीक्षण की तैयारी कराई जा रही है।

प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को 100 मीटर दौड़, 1500 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और गोला फेंक जैसी गतिविधियों का अभ्यास कराया जाता है। सुबह के समय करीब दो घंटे तक फिजिकल ट्रेनिंग होती है। इसके साथ ही उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाता है, ताकि वे भर्ती प्रक्रिया के दोनों चरणों के लिए बेहतर तैयारी कर सकें।

युवाओं को घर के पास मिल रही तैयारी की सुविधा

नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक रोजगार और शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच कई युवाओं के लिए चुनौती रही है। ऐसे में भर्ती की तैयारी के लिए दूर शहरों में जाना भी आसान नहीं था। मुफ्त प्रशिक्षण की सुविधा मिलने से स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही तैयारी करने का अवसर मिल रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कांकेर का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है। इसका असर शिक्षा, रोजगार और युवाओं के अवसरों पर भी पड़ा। कई युवाओं को आर्थिक और भौगोलिक कारणों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था शुरू की गई।

बेटियां भी दिखा रहीं दम

अभियान की एक खास तस्वीर यह है कि इसमें युवतियों की भागीदारी भी लगातार दिखाई दे रही है। जो बेटियां पहले कई कारणों से घर तक सीमित रहती थीं, वे अब भर्ती की तैयारी के लिए मैदान में नियमित अभ्यास कर रही हैं। दौड़ और अन्य शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेकर वे सुरक्षा सेवाओं में करियर बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं।

आमाबेड़ा में बदलता माहौल इलाके में आए बदलाव की एक तस्वीर पेश करता है। जहां कभी डर और हिंसा से जुड़ी गतिविधियों का असर दिखाई देता था, वहीं अब युवा रोजगार, शिक्षा और सरकारी सेवा में अवसर तलाशते नजर आ रहे हैं। ‘मिशन रक्षक’ के जरिए युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण देकर उन्हें भर्ती प्रक्रिया के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

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