28 May 2026, Thu

ईरान से डील ना हो पाने की खिसियाहट के बीच मीडिया पर बुरी तरह भड़के ट्रंप, जानें क्या कहा

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर देश की मुख्यधारा मीडिया और डेमोक्रेटिक पार्टी पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने दावा किया कि यदि ईरान पूरी तरह आत्मसमर्पण भी कर दे, तब भी कुछ अमेरिकी मीडिया संस्थान और उनके राजनीतिक विरोधी इसे ईरान की जीत के रूप में पेश करेंगे।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की उपलब्धियों को जानबूझकर कमतर दिखाने और राजनीतिक एजेंडे के तहत खबरों को प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, कुछ मीडिया संस्थान किसी भी परिस्थिति में उनकी नीतियों या अमेरिकी रणनीति को सफलता के रूप में स्वीकार नहीं करना चाहते।

अपने पोस्ट में ट्रंप ने एक काल्पनिक स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ईरान यह स्वीकार कर ले कि उसकी नौसेना नष्ट हो चुकी है, उसकी वायुसेना समाप्त हो गई है और उसकी सैन्य शक्ति पूरी तरह कमजोर पड़ चुकी है, यहां तक कि यदि ईरानी नेतृत्व आधिकारिक तौर पर आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दे, तब भी अमेरिकी मीडिया इसे अमेरिका की जीत नहीं बताएगा। ट्रंप ने दावा किया कि ऐसे हालात में भी कुछ मीडिया संस्थान यह दिखाने की कोशिश करेंगे कि ईरान ने किसी न किसी रूप में जीत हासिल कर ली है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी पोस्ट में कई प्रमुख मीडिया संगठनों को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समाचार संस्थान लगातार पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग कर रहे हैं और अमेरिकी जनता के सामने वास्तविक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं। ट्रंप का कहना है कि मीडिया और डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ नेता उनकी विदेश नीति की सफलताओं को स्वीकार करने के बजाय आलोचना करने में अधिक रुचि रखते हैं।

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने तथा संभावित समझौते को लेकर बातचीत जारी है। हालांकि दोनों देशों के बीच कई दौर की चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब तक किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की गई है। क्षेत्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह प्रतिक्रिया केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका के अंदर चल रहे राजनीतिक संघर्ष का भी हिस्सा है। राष्ट्रपति चुनावों के बाद से ट्रंप और मुख्यधारा मीडिया के बीच टकराव लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। ट्रंप कई बार मीडिया पर “फेक न्यूज” फैलाने का आरोप लगा चुके हैं, जबकि मीडिया संस्थान उनके बयानों और नीतियों की तथ्यात्मक जांच की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।

इस बीच, मध्य पूर्व में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच चल रही कूटनीतिक गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच कोई व्यापक समझौता होता है तो इसका प्रभाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल, ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर अमेरिकी राजनीति, मीडिया की भूमिका और ईरान नीति को लेकर बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों पक्ष किसी स्थायी समझौते तक पहुंच पाते हैं।

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