5 Jun 2026, Fri

ईरान से अब युद्ध नहीं लड़ पाएंगे ट्रंप? अमेरिकी संसद ने सेना वापस बुलाने के प्रस्ताव को दी मंजूरी, आगे क्या होगा

वाशिंगटन: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को सीमित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण युद्ध शक्ति प्रस्ताव (War Powers Resolution) पारित कर दिया है। इस प्रस्ताव को 215 के मुकाबले 208 मतों से मंजूरी मिली। मतदान के दौरान कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर डेमोक्रेट्स का समर्थन किया, जिससे प्रस्ताव के पक्ष में बहुमत सुनिश्चित हुआ।

इस कदम को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ बढ़ते राजनीतिक असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कई महीनों से जारी सैन्य तनाव और उसके आर्थिक प्रभावों ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। डेमोक्रेटिक नेताओं का कहना है कि यह संघर्ष अमेरिकी करदाताओं पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है और देश के रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।

डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज़ ने मतदान से पहले कहा कि यह “लापरवाह और खर्चीला युद्ध” तुरंत समाप्त होना चाहिए। उनके अनुसार, इस संघर्ष पर अब तक 100 अरब डॉलर से अधिक खर्च हो चुका है, जबकि इससे अमेरिका की स्थिति मजबूत होने के बजाय कमजोर हुई है।

इससे पहले अमेरिकी सीनेट भी इसी प्रकार का एक प्रस्ताव पारित कर चुकी है। वहां भी कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप के रुख से अलग होकर सैन्य कार्रवाई को सीमित करने की मांग का समर्थन किया था। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर युद्ध को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि हाउस द्वारा पारित यह प्रस्ताव युद्ध को तुरंत समाप्त नहीं करेगा। यह मुख्य रूप से एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक संदेश है, जिसके माध्यम से कांग्रेस राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच युद्ध संबंधी अधिकारों को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है।

ईरान के साथ बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई दिया है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार चिंतित हैं। अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी ईंधन की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ा है।

अब आगे की प्रक्रिया में यह प्रस्ताव सीनेट में विचार के लिए जाएगा। यदि वहां इसे अंतिम मंजूरी मिलती है, तो यह राष्ट्रपति ट्रंप के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। हालांकि, राष्ट्रपति के पास वीटो का अधिकार भी होगा, जिससे इस प्रस्ताव के भविष्य को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका की ईरान नीति, कांग्रेस की भूमिका और मध्य पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यह फैसला न केवल अमेरिकी राजनीति बल्कि वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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