ईरान ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा की, UN में दर्ज कराई शिकायत
तेहरान/संयुक्त राष्ट्र: ईरान ने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों पर कथित नौसैनिक नाकेबंदी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर अमेरिका के कदम की कड़ी निंदा की है।
ईरान ने इस कार्रवाई को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन बताया है।
‘अवैध और आक्रामक कार्रवाई’ का आरोप
ईरानी राजदूत अमीर सईद इरावानी ने अपने पत्र में कहा कि अमेरिका द्वारा की गई यह नौसैनिक नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम न केवल ईरान के संप्रभु अधिकारों के खिलाफ है, बल्कि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इरावानी ने कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा घोषित यह कदम UN चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करता है, जो किसी भी देश के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी को प्रतिबंधित करता है।
समुद्री व्यापार बाधित करने का आरोप
पत्र में आगे कहा गया कि ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को रोकने की कोशिश अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का भी उल्लंघन है। ईरान ने इसे “अवैध हस्तक्षेप” बताते हुए कहा कि इससे वैध वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है।
ईरानी पक्ष का कहना है कि इस कदम से क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और अधिक बढ़ सकता है और इसका असर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ईरान ने दी कड़ी चेतावनी
अमीर सईद इरावानी ने अपने बयान में कहा कि ईरान इस कार्रवाई को पूरी तरह खारिज करता है और अपनी संप्रभुता व राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस कदम और इसके परिणामों के लिए अमेरिका पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
UN से हस्तक्षेप की मांग
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि सुरक्षा परिषद को इस कथित नाकेबंदी की निंदा करनी चाहिए और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
ईरान ने अनुरोध किया है कि उसके इस पत्र को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में प्रसारित किया जाए।
बढ़ता अंतरराष्ट्रीय तनाव
इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।

