28 Jul 2026, Tue
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‘अमेरिका फर्स्ट’ या ‘इजरायल फर्स्ट’ पर अटकी बात, जानें बातचीत से ठीक पहले ईरान ने क्या कहा

इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय वार्ता शुरू, 15 दिन की डेडलाइन के बीच बढ़ा तनाव

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच एक बेहद अहम और उच्चस्तरीय वार्ता शुरू होने जा रही है, जिसे क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बैठक को “करो या मरो” जैसी निर्णायक बातचीत बताया है।

यह वार्ता 8 अप्रैल को घोषित अस्थायी युद्धविराम के बाद हो रही है और उम्मीद की जा रही है कि इससे मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बातचीत शुरू होने से पहले ही दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर गहरे मतभेद सामने आ चुके हैं।

इस्लामाबाद में पहुंचे दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका दोनों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। शनिवार सुबह ईरानी डेलिगेशन प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए रवाना हुआ। ईरानी टीम का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागैर गालिबफ कर रहे हैं, जो कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आधी रात के बाद पाकिस्तान पहुंचे।

दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं। इनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर शामिल बताए जा रहे हैं। अमेरिकी विमान के भी शनिवार सुबह इस्लामाबाद पहुंचने की पुष्टि हुई है।

‘अमेरिका फर्स्ट’ बनाम ‘इजरायल फर्स्ट’ बयान से बढ़ा तनाव

वार्ता से पहले ही राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरिफ़ ने कहा है कि यदि बातचीत “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के तहत होती है, तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी समझौते की दिशा में जा सकती है।

हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि “इजरायल फर्स्ट” नीति अपनाई गई, तो किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा, जिसका असर वैश्विक स्तर पर गंभीर हो सकता है।

उनके इस बयान के बाद कूटनीतिक हलकों में चिंता बढ़ गई है और माना जा रहा है कि वार्ता बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुकी है।

15 दिनों की समयसीमा तय

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अनुसार, इस वार्ता के लिए 15 दिनों की समयसीमा तय की गई है। इस दौरान दोनों देशों को किसी ठोस समझौते पर पहुंचने की कोशिश करनी होगी। आने वाले 48 घंटे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो यह तय करेंगे कि मौजूदा युद्धविराम स्थायी शांति में बदल पाएगा या नहीं।

यदि वार्ता विफल होती है, तो क्षेत्र में एक बार फिर तनाव और संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वार्ता

इस्लामाबाद में इस वार्ता को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान की हवाई सीमा में एंट्री के दौरान AWACS, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान और लड़ाकू विमानों की तैनाती की गई।

इसके अलावा इस्लामाबाद और रावलपिंडी में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

वैश्विक नजरें वार्ता पर टिकीं

इस महत्वपूर्ण बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह वार्ता सफल होती है, तो यह न केवल ईरान और अमेरिका के रिश्तों में सुधार ला सकती है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

हालांकि, मौजूदा हालात और बयानबाजी को देखते हुए यह वार्ता बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की नजरें अगले 48 घंटों पर हैं, जो इस ऐतिहासिक बातचीत की दिशा तय करेंगे।

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