नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुएं लाल निशान में कारोबार करती नजर आईं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाओं का असर सीधे तौर पर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है।
एमसीएक्स पर 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना गुरुवार को गिरावट के साथ 1,46,518 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,48,017 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और यह 1,47,620 रुपये के इंट्राडे हाई तथा 1,46,444 रुपये प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। सुबह के कारोबार में सोना करीब 660 रुपये की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया।
वहीं चांदी में भी कमजोरी बनी रही। 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 2,31,671 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर खुली, जबकि पिछले दिन यह 2,35,505 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। दिन के कारोबार में चांदी का भाव 2,34,527 रुपये के उच्च स्तर और 2,30,493 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में चांदी में लगभग 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
इससे पहले बुधवार को भी सर्राफा बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, दिल्ली बाजार में चांदी की कीमतों में लगभग 10,000 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि सोने के दाम भी 4,300 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गए थे। लगातार दो दिनों से जारी इस गिरावट ने निवेशकों और कारोबारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं।
ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से डॉलर को मजबूती मिली है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब आमतौर पर सोने और चांदी जैसी धातुओं की मांग कमजोर पड़ जाती है, क्योंकि ये निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक हो जाती हैं। यही वजह है कि हाल के दिनों में कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों को बाजार में सतर्कता बरतने और किसी भी बड़े निवेश निर्णय से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेने की जरूरत है।

