नई दिल्ली: हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को अक्सर लोग एक ही बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दोनों स्थितियां अलग हैं। सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता (FSCAI, FACC, FACP) के अनुसार, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के कारण, लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं। सही समय पर इनकी पहचान और उचित उपचार मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ. गुप्ता बताते हैं कि हार्ट अटैक (Heart Attack) तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है। इस रुकावट के कारण हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। दूसरी ओर, कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) में हृदय अचानक प्रभावी रूप से धड़कना बंद कर देता है, जिससे शरीर में रक्त का प्रवाह रुक जाता है।
हार्ट अटैक के सामान्य लक्षण
हार्ट अटैक के दौरान व्यक्ति को कई चेतावनी संकेत महसूस हो सकते हैं। इनमें सीने में दर्द या दबाव, सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी, चक्कर आना और कुछ मामलों में दर्द का कंधे, हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना शामिल हो सकता है।
कई बार हार्ट अटैक के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं, इसलिए मरीज को समय रहते अस्पताल पहुंचाने से उपचार का परिणाम बेहतर हो सकता है।
कार्डियक अरेस्ट के लक्षण अलग होते हैं
कार्डियक अरेस्ट में स्थिति अचानक गंभीर हो जाती है। व्यक्ति बिना किसी चेतावनी के बेहोश होकर गिर सकता है। उसकी नाड़ी महसूस नहीं होती, सांस बंद हो सकती है या असामान्य हो सकती है और वह किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं देता।
यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि तुरंत उपचार नहीं मिलता, तो जान का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
क्या हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है?
डॉ. समीर गुप्ता के अनुसार, हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन हर हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट में नहीं बदलता। कुछ मरीजों में हार्ट अटैक के कारण हृदय की विद्युत प्रणाली प्रभावित हो सकती है, जिससे हृदय की धड़कन रुकने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इसलिए हार्ट अटैक के लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
इलाज में क्या अंतर है?
हार्ट अटैक के उपचार का मुख्य उद्देश्य बंद या संकरी हुई धमनी को जल्द से जल्द खोलना होता है। इसके लिए अस्पताल में एंजियोप्लास्टी, स्टेंट या अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।
वहीं कार्डियक अरेस्ट में सबसे पहले तुरंत सीपीआर (CPR) शुरू करना जरूरी होता है। यदि उपलब्ध हो, तो AED (Automated External Defibrillator) का उपयोग भी जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सीपीआर और डिफिब्रिलेशन जितनी जल्दी शुरू किया जाए, मरीज के बचने की संभावना उतनी अधिक हो सकती है।
समय पर पहचान है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि सीने में दर्द, अचानक सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना या अचानक बेहोश हो जाना जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच अंतर को समझना आम लोगों के लिए बेहद जरूरी है। सही जानकारी, समय पर अस्पताल पहुंचना और जरूरत पड़ने पर सीपीआर देना किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है। इसलिए हर परिवार में कम से कम एक सदस्य को बेसिक सीपीआर की ट्रेनिंग लेने की सलाह दी जाती है।

