AAP में बड़ी राजनीतिक टूट: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल, पार्टी में मचा हड़कंप
आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा के साथ राज्यसभा के 7 सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ AAP को झटका दिया है, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही लंबे समय से असंतोष और गुटबाजी को भी सामने ला दिया है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक सरगर्मी तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टूट AAP के लिए एक बड़ी संगठनात्मक चुनौती बन सकती है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
सूत्रों के अनुसार, इस राजनीतिक संकट की शुरुआत 2024 के बाद से मानी जा रही है, जब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर अपने साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद पार्टी के भीतर असहजता बढ़ती चली गई और कई वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद गहराने लगे।
स्वाति मालीवाल ने हाल ही में आरोप लगाया कि पार्टी में भ्रष्टाचार, महिलाओं के कथित उत्पीड़न और आंतरिक गुटबाजी लगातार बढ़ रही थी, जिसके चलते उन्होंने पार्टी से दूरी बनाने का फैसला लिया।
राघव चड्ढा की भूमिका और बदलाव
राघव चड्ढा, जिन्हें कभी अरविंद केजरीवाल का करीबी और भरोसेमंद नेता माना जाता था, 2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। लेकिन 2024 के बाद से उनके राजनीतिक प्रभाव में गिरावट देखी गई।
पार्टी के अंदर उन्हें कई अहम जिम्मेदारियों से हटाया गया, जिसमें पंजाब मामलों का सह-प्रभार और चुनाव रणनीति से जुड़ी भूमिकाएं शामिल थीं। हाल ही में उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता पद से भी हटा दिया गया था, जिसके बाद उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी और बढ़ गई।
सामूहिक इस्तीफे से बढ़ा संकट
शुक्रवार को राघव चड्ढा ने 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने की पुष्टि की और इसके तुरंत बाद सभी सांसदों ने बीजेपी की सदस्यता ले ली। इनमें अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और संदीप पाठक जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
AAP नेताओं का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम बीजेपी के “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा है, जिसके तहत विपक्षी दलों के नेताओं को तोड़कर पार्टी में शामिल किया जा रहा है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
AAP नेता संजय सिंह ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सांसदों पर दबाव बनाकर करवाया गया फैसला है और इसके पीछे केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का डर भी एक कारण हो सकता है।
वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नेता अपनी मर्जी से पार्टी में शामिल हुए हैं और यह AAP के भीतर आंतरिक असंतोष का नतीजा है।
AAP के लिए बड़ा झटका
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम AAP के लिए खासतौर पर पंजाब, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकता है। पार्टी पहले ही कई नेताओं के असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही थी, और अब यह टूट स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
निष्कर्ष
AAP में यह टूट केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों का परिणाम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है और क्या यह घटनाक्रम देश की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत है या सिर्फ एक और दल-बदल की घटना।

