बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘ईठा’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘स्त्री 2’ की शानदार सफलता के बाद अभिनेत्री एक बार फिर बिल्कुल अलग तरह के किरदार में नजर आने वाली हैं। इस बार वह महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला, तमाशा और लावणी की दुनिया से जुड़ी एक प्रसिद्ध कलाकार का किरदार निभाएंगी। हाल ही में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान श्रद्धा ने बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने का फैसला क्यों किया और निर्देशक की सोच उन्हें किस तरह प्रभावित कर गई।
अलग कहानी ने आकर्षित किया श्रद्धा कपूर को
श्रद्धा कपूर के मुताबिक, इस फिल्म का हिस्सा बनने का अवसर मिलना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। उन्होंने निर्देशक लक्ष्मण उतेकर के फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि पिछली ऐतिहासिक फिल्म की सफलता के बाद उनके लिए उसी तरह की एक और फिल्म बनाना आसान विकल्प हो सकता था। हालांकि, निर्देशक ने इसके बजाय एक बिल्कुल अलग दुनिया और कहानी को पर्दे पर लाने का फैसला किया।
अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने निर्देशक से भी इस चुनाव के पीछे की वजह पूछी थी। निर्देशक का उद्देश्य दर्शकों को एक नई दुनिया से परिचित कराना था। श्रद्धा को यही सोच खास लगी, क्योंकि यह फिल्म पारंपरिक ऐतिहासिक कहानियों से अलग लोककला और एक महिला कलाकार के संघर्षपूर्ण जीवन को सामने लाती है।
महाराष्ट्र की लोककला से जुड़ी है फिल्म की कहानी
‘ईठा’ एक बायोपिक म्यूजिकल फिल्म है, जो महाराष्ट्र की प्रसिद्ध तमाशा और लावणी कलाकार विठाबाई भाऊ मांग नारायणगांवकर के जीवन से प्रेरित है। फिल्म में श्रद्धा कपूर विठाबाई के किरदार में नजर आएंगी। यह कहानी उस कलाकार के जीवन, कला के प्रति समर्पण और संघर्षों को दर्शाने का प्रयास करती है, जिसने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी कला को जीवित रखा।
तमाशा महाराष्ट्र की पारंपरिक लोकनाट्य शैली है, जबकि लावणी संगीत और नृत्य से जुड़ी लोकप्रिय लोककला है। इन दोनों परंपराओं का महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान में महत्वपूर्ण स्थान है। फिल्म के माध्यम से दर्शकों को इन कलाओं की दुनिया और उनसे जुड़े कलाकारों के जीवन को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
मुश्किलों के बावजूद कला के प्रति समर्पण
विठाबाई नारायणगांवकर का जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल माना जाता है। उन्होंने अपने करियर के दौरान व्यक्तिगत और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन अपनी कला से जुड़ी रहीं। उनके जीवन से जुड़ी एक घटना विशेष रूप से चर्चा में रही है। बताया जाता है कि एक प्रस्तुति के दौरान उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। उन्होंने मंच के पीछे बच्चे को जन्म दिया और कुछ समय बाद दोबारा प्रस्तुति देने पहुंच गईं।
उनके जीवन की ऐसी घटनाएं उनकी कला के प्रति प्रतिबद्धता और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने के जज्बे को दर्शाती हैं। फिल्म में इस संघर्षपूर्ण यात्रा को किस तरह पेश किया जाता है, यह देखना दर्शकों के लिए दिलचस्प होगा।
दमदार कलाकारों से सजी है फिल्म
इस फिल्म में श्रद्धा कपूर के साथ रणदीप हुड्डा, मोहम्मद जीशान अय्यूब, अनंत जोशी और सिद्धार्थ जाधव भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है। लोककला, संगीत और एक असाधारण महिला की जीवन यात्रा पर आधारित यह कहानी दर्शकों के सामने एक अलग सिनेमाई अनुभव पेश कर सकती है।
अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि श्रद्धा कपूर इस चुनौतीपूर्ण किरदार को किस अंदाज में पर्दे पर उतारती हैं। उनकी पिछली फिल्मों से अलग विषय और लोककला की पृष्ठभूमि वाली यह फिल्म उनके करियर का एक नया अध्याय साबित हो सकती है। हालांकि, फिल्म को लेकर दर्शकों की वास्तविक प्रतिक्रिया इसकी रिलीज के बाद ही सामने आएगी।

