नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के लिए लागू रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आ रहे भेदभाव के दावों को सरकार ने खारिज कर दिया है। संचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन समेत सभी टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं के लिए ऑथराइजेशन का ढांचा निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से तैयार किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, भारत में नॉन-जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट ऑर्बिट यानी NGSO आधारित ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट यानी GMPCS सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तीन वैश्विक कंपनियों को टेलीकॉम लाइसेंस दिए गए हैं। इन कंपनियों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और नियामकीय प्रावधानों के तहत पूरी की गई है।
सरकार ने उन दावों को गलत बताया है जिनमें यह कहा जा रहा था कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में किसी विशेष कंपनी को नियमों के स्तर पर फायदा दिया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि सभी लाइसेंसधारियों पर लागू नियम और आवश्यकताएं समान हैं। इसलिए किसी कंपनी के साथ अलग व्यवहार किए जाने का सवाल नहीं उठता।
सुरक्षा शर्तों का पालन अनिवार्य
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस प्रदान करने वाली प्रत्येक लाइसेंसधारी कंपनी को सुरक्षा से जुड़ी सभी आवश्यक शर्तों का पालन करना होगा। इन प्रावधानों का उद्देश्य देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ यूजर्स और उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सैटेलाइट आधारित कम्युनिकेशन सेवाओं में बड़ी मात्रा में संचार और डिजिटल डेटा का इस्तेमाल होता है। ऐसे में सरकार की ओर से लाइसेंसधारी कंपनियों के लिए सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है। कंपनियों को निर्धारित सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
सुरक्षा मूल्यांकन के बाद मिलेगा स्पेक्ट्रम
मंत्रालय के मुताबिक, तीनों लाइसेंसधारी कंपनियों के लिए सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। संबंधित कंपनियों को निर्धारित सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वे स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े अगले चरण में आगे बढ़ सकेंगी।
सरकार ने यह भी कहा कि टेलीकॉम लाइसेंस मिल जाना अपने आप में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस शुरू करने की अंतिम अनुमति नहीं है। इसके लिए लाइसेंस की सभी शर्तों को पूरा करना और जरूरी नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना आवश्यक है।
सभी कंपनियां लगभग समान नियामकीय चरण में
मंत्रालय ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान समय में तीनों लाइसेंसधारी कंपनियां लगभग समान रेगुलेटरी स्टेज पर हैं। सभी के लिए सुरक्षा मूल्यांकन और अन्य निर्धारित प्रक्रियाएं लागू हैं।
सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में रेगुलेटरी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति साफ होने की उम्मीद है। मंत्रालय ने दोहराया कि भारत का ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क सभी टेलीकम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए समान, पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण है।
सैटेलाइट कम्युनिकेशन को भारत में इंटरनेट और कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर उन दूरदराज के क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है, सैटेलाइट आधारित सेवाएं भविष्य में कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।

