13 Oct 2026, Tue

सेमीकंडक्टर की दुनिया में भारत मचा सकता है धूम, टाटा संस के एन चंद्रशेखरन ने बताया कैसे ग्लोबल सप्लाई चेन में बढ़ेगा देश का दबदबा

आज के दौर में मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए सेमीकंडक्टर चिप बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं। दुनिया भर में इनकी बढ़ती मांग के बीच भारत के पास वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने का बड़ा अवसर है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के मुताबिक, कुशल प्रतिभाओं, बड़े घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी के दम पर भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने मंगलवार को आयोजित 2026 ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि यह तकनीक भारत के भविष्य के लिए काफी अहम होगी। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में निवेश को केवल दो या तीन साल में मिलने वाले वित्तीय लाभ के आधार पर नहीं देखना चाहिए। इसके बजाय देश की दीर्घकालिक जरूरतों, तकनीकी क्षमता और औद्योगिक विकास को ध्यान में रखना जरूरी है।

भारत के पास क्यों है बड़ा अवसर?

सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल आज लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में होता है। इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन, कंप्यूटर, औद्योगिक मशीनों और AI आधारित तकनीकों के विस्तार के साथ इनकी जरूरत लगातार बढ़ रही है।

भारत के पास बड़ी संख्या में कुशल इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ हैं। इसके अलावा, देश का विशाल घरेलू बाजार भी चिप निर्माण उद्योग के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यदि भारत वैश्विक कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाता है और जरूरी बुनियादी ढांचे को विकसित करता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकता है।

हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति और लंबे समय तक निवेश बनाए रखना भी जरूरी होगा।

गुजरात और असम में टाटा समूह की बड़ी परियोजनाएं

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए टाटा समूह ने गुजरात और असम में बड़े निवेश की योजनाएं बनाई हैं। गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ताइवान की कंपनी पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (PSMC) के साथ मिलकर चिप निर्माण संयंत्र विकसित कर रही है। इस परियोजना में करीब 91,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

इस संयंत्र में तैयार होने वाली चिप का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, मोबाइल उपकरणों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सकेगा। इससे भारत में चिप निर्माण क्षमता विकसित करने और घरेलू उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, असम में लगभग 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा विकसित की जा रही है। ऐसी सुविधाएं चिप निर्माण के बाद उन्हें जोड़ने, जांचने और उपयोग के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

निवेश के साथ आर्थिक व्यवहार्यता भी जरूरी

एन. चंद्रशेखरन ने यह भी कहा कि भारत को केवल सबसे आधुनिक चिप बनाने की दौड़ में शामिल होने के बजाय बाजार की वास्तविक मांग और परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता पर ध्यान देना चाहिए।

सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़े निवेश, उन्नत तकनीक और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। इसलिए परियोजनाओं की योजना इस तरह बनानी चाहिए कि वे लंबे समय तक टिकाऊ कारोबार कर सकें और रोजगार के अवसर पैदा करें।

कुल मिलाकर, सेमीकंडक्टर क्षेत्र भारत के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास का बड़ा अवसर बन सकता है। गुजरात और असम में प्रस्तावित निवेश, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कुशल प्रतिभाओं का उपयोग देश को वैश्विक चिप सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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