वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: अमेरिका ने पाकिस्तान से उसके सैन्य और खुफिया तंत्र पर होने वाले खर्च के संबंध में अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग की है। अमेरिकी विदेश विभाग की फिस्कल ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट 2026 में पाकिस्तान के सार्वजनिक वित्त प्रबंधन और बजट प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि रक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े वित्तीय मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि वह बजट प्रस्ताव समय पर सार्वजनिक करे और रक्षा तथा खुफिया संस्थानों पर होने वाले खर्च की जानकारी संसदीय या नागरिक निगरानी व्यवस्था के दायरे में लाने पर विचार करे। रिपोर्ट में सरकारी कर्ज और वित्तीय दायित्वों से जुड़ी जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने की भी सिफारिश की गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़े क्षेत्रों में स्पष्टता और निगरानी बढ़ाना सुशासन के लिए महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में पाकिस्तान से सैन्य और खुफिया एजेंसियों के बजट संबंधी जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने की बात कही गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जिन देशों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है या जिनके साथ वित्तीय सहयोग के कार्यक्रम चलते हैं, उनके वित्तीय प्रबंधन और बजट पारदर्शिता का समय-समय पर आकलन करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सार्वजनिक धन और अंतरराष्ट्रीय सहायता का उपयोग जवाबदेही के साथ किया जा रहा है।
उपलब्ध अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अमेरिका ने पाकिस्तान को विभिन्न मदों के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की थी। इसके अलावा, जुलाई 2026 में पाकिस्तान द्वारा अमेरिका से मुद्रा स्थिरता सुविधा से संबंधित एक बड़े वित्तीय सहयोग का अनुरोध किए जाने की भी चर्चा रही है। ऐसे मामलों में वित्तीय पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही को आम तौर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।
पाकिस्तान सरकार द्वारा जून 2026 में पेश किए गए संघीय बजट के अनुसार, रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 3.01 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का आवंटन किया गया था। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। पाकिस्तान का कुल संघीय बजट लगभग 18.8 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये के आसपास बताया गया था, जिसमें रक्षा व्यय का हिस्सा लगभग 16 प्रतिशत के करीब है।
अमेरिकी रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े व्यय की जानकारी को अधिक व्यवस्थित रूप से सार्वजनिक करना निवेशकों के विश्वास, वित्तीय स्थिरता और लोकतांत्रिक निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में मददगार हो सकता है।
फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से अमेरिकी रिपोर्ट पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि इस रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान के रक्षा और खुफिया बजट को लेकर पारदर्शिता, संसदीय निगरानी और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग, वित्तीय सुधार और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे द्विपक्षीय बातचीत के महत्वपूर्ण विषय बने रह सकते हैं।

