19 Sep 2026, Sat

सरकार ने CBFC को दी नई गाइडलाइन, ड्रग वॉर्निंग से लेकर एज रेटिंग्स तक, सेंसर बोर्ड में शामिल किए गए नए नियम

फिल्मों में दिखाई जाने वाली संवेदनशील सामग्री को लेकर केंद्र सरकार ने सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने फिल्म प्रमाणन के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था ने दिसंबर 1991 में जारी पुराने दिशा-निर्देशों की जगह ली है। इसका उद्देश्य फिल्मों के कंटेंट को मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों और दर्शकों की उम्र के अनुरूप प्रमाणित करने की प्रक्रिया को अपडेट करना है। नई व्यवस्था में नशीले पदार्थों, हिंसा, अपराध और बच्चों से जुड़े संवेदनशील दृश्यों को लेकर भी कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।

उम्र के हिसाब से मिलेगी फिल्म की कैटेगरी

नई व्यवस्था में फिल्मों के लिए उम्र आधारित UA कैटेगरी को प्रमुखता दी गई है। अब फिल्मों को U, UA 7+, UA 13+, UA 16+, A और S जैसी श्रेणियों में प्रमाणित किया जा सकता है। UA 7+, UA 13+ और UA 16+ का मतलब है कि संबंधित उम्र से कम बच्चों को फिल्म देखने की अनुमति देने का फैसला माता-पिता या अभिभावक को फिल्म की सामग्री को ध्यान में रखकर करना होगा। इससे अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए फिल्म की उपयुक्तता को अधिक स्पष्ट तरीके से बताया जा सकेगा।

ड्रग्स वाले दृश्यों पर खास चेतावनी जरूरी

नई गाइडलाइंस में नशीले या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन, इस्तेमाल, बिक्री या तस्करी को दिखाने वाली फिल्मों के लिए चेतावनी से जुड़े प्रावधानों पर जोर दिया गया है। ऐसे कंटेंट के साथ निर्धारित स्वास्थ्य और कानूनी चेतावनी दिखाना जरूरी होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फिल्मों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को केवल मनोरंजन या ग्लैमर के तौर पर पेश न किया जाए।

हिंसा और अपराध के चित्रण पर भी नियम

फिल्मों में हिंसा और अपराध के दृश्यों को लेकर भी संशोधित दिशा-निर्देशों में सावधानी बरतने की बात कही गई है। समाज-विरोधी गतिविधियों या हिंसक व्यवहार को इस तरह प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए कि वह आकर्षक या उचित नजर आए। फिल्म के विषय, कहानी और संदर्भ को ध्यान में रखते हुए प्रमाणन की श्रेणी तय की जाएगी।

बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, जानवरों के प्रति क्रूरता और दिव्यांग लोगों से जुड़े संवेदनशील दृश्यों को भी अनावश्यक रूप से दिखाने पर आपत्ति का प्रावधान रखा गया है। यानी फिल्म निर्माताओं को ऐसे विषयों को पर्दे पर प्रस्तुत करते समय उनके संदर्भ और प्रभाव का ध्यान रखना होगा।

पुरानी व्यवस्था की जगह नया फ्रेमवर्क

फिल्म प्रमाणन के लिए जारी नए दिशा-निर्देश अब पुराने 1991 वाले फ्रेमवर्क की जगह लागू होंगे। हालांकि उम्र आधारित UA मार्कर पहले ही प्रमाणन व्यवस्था का हिस्सा बनाए जा चुके थे, नई गाइडलाइंस में इन्हें व्यापक प्रमाणन ढांचे के साथ शामिल किया गया है। मौजूदा व्यवस्था में फिल्म की सामग्री के आधार पर दर्शकों के लिए उसकी उपयुक्तता तय की जाती है।

नई गाइडलाइंस के लागू होने के बाद फिल्म निर्माताओं के लिए संवेदनशील कंटेंट के चित्रण और उसकी प्रस्तुति को लेकर नियम पहले से अधिक स्पष्ट होंगे। वहीं दर्शकों और अभिभावकों को भी फिल्म की सामग्री और उम्र संबंधी उपयुक्तता के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकेगी।

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