30 Apr 2026, Thu

शहबाज शरीफ ने ट्रंप को दे दिया धोखा? अमेरिकी नाकेबंदी के बीच ईरान के लिए खोले 6 जमीनी रास्ते

पाकिस्तान पर अमेरिका को धोखा देने के आरोप, ईरान के लिए खोले 6 नए ज़मीनी रास्ते, ट्रंप की रणनीति पर असर

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि पाकिस्तान ने ईरान को रूस, चीन और अन्य देशों के साथ व्यापार करने के लिए 6 नए ज़मीनी मार्ग उपलब्ध कराए हैं। इस कदम को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है और पाकिस्तान पर अमेरिका की रणनीति को कमजोर करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

पाकिस्तान पर दोहरे खेल का आरोप

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डेरेक जे ग्रॉसमैन ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान की यह कार्रवाई अमेरिका की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति को नुकसान पहुंचा सकती है। उनके अनुसार, इन नए मार्गों के जरिए ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी से बचकर व्यापार जारी रखने में मदद मिलेगी।

ग्रॉसमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पाकिस्तान एक तरफ शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की बात करता है, जबकि दूसरी तरफ ऐसे कदम उठा रहा है जो अमेरिका की नीति के खिलाफ जाते हैं।

ईरान की आर्थिक रणनीति को राहत

विश्लेषकों का मानना है कि इन नए ज़मीनी रास्तों से ईरान को महत्वपूर्ण राहत मिल सकती है। इससे ईरान अपने तेल और अन्य व्यापार को वैकल्पिक मार्गों से जारी रखने में सक्षम होगा, खासकर तब जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव लगातार बना हुआ है।

अमेरिका लंबे समय से ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि तेहरान को अपनी परमाणु नीति और क्षेत्रीय गतिविधियों पर समझौते के लिए मजबूर किया जा सके।

पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। इजरायल के राजदूत ने भी पाकिस्तान को “अविश्वसनीय मध्यस्थ” बताया था। वहीं ईरान के अधिकारियों ने भी पाकिस्तान की तटस्थता पर संदेह जताया है और इसे पक्षपाती रुख रखने वाला देश बताया है।

ईरानी सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान भले ही दोस्ताना देश हो, लेकिन वह पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने में सक्षम नहीं दिखता।

अमेरिका की रणनीति को झटका

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए समुद्री नाकेबंदी और कड़े प्रतिबंधों की नीति पर काम कर रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य ईरान को वार्ता की टेबल पर मजबूर करना है।

लेकिन पाकिस्तान द्वारा ईरान के लिए ज़मीनी व्यापार मार्ग खोलने के बाद माना जा रहा है कि यह रणनीति कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान वैकल्पिक व्यापार मार्ग विकसित करने में सफल रहा, तो अमेरिकी दबाव का असर सीमित हो जाएगा।

बढ़ता कूटनीतिक तनाव

इस घटनाक्रम ने अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में भी नई बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिका के कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद लगातार “डबल गेम” खेल रहा है, जहां एक तरफ वह अमेरिका का साझेदार होने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर उसके रणनीतिक हितों के खिलाफ कदम भी उठाता है।

फिलहाल इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह मामला तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है।

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