5 Aug 2026, Wed

‘वो स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं था’, बांग्लादेश से निष्कासन की दूसरी बरसी पर बोलीं शेख हसीना

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और आवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने देश से निष्कासन की दूसरी बरसी पर निर्वासन से एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बांग्लादेश लौटने की अपनी इच्छा दोहराई। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और वह अपने देश की जनता के साथ फिर से खड़ी होना चाहती हैं। उनके संबोधन से पहले निर्वासन में रह रहे आवामी लीग के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी बांग्लादेश की सत्तारूढ़ BNP सरकार पर तीखा हमला बोला और देश की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।

यह कार्यक्रम शेख हसीना के निष्कासन की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न देशों में रह रहे आवामी लीग समर्थकों और नेताओं ने भाग लिया। पूरे कार्यक्रम में बांग्लादेश की राजनीति, लोकतंत्र, धार्मिक कट्टरवाद और भविष्य की दिशा जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए।

बांग्लादेश लौटने की इच्छा दोहराई

अपने संबोधन में शेख हसीना ने कहा कि वह बांग्लादेश लौटने के लिए प्रतिबद्ध हैं और देश की जनता से उनका रिश्ता कभी नहीं टूट सकता। उन्होंने संकेत दिया कि आवामी लीग लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी राजनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उनके अनुसार बांग्लादेश का भविष्य लोकतंत्र, विकास और सामाजिक सौहार्द पर आधारित होना चाहिए।

आवामी लीग नेताओं ने BNP पर साधा निशाना

शेख हसीना के भाषण से पहले उनके नेतृत्व वाली पूर्व सरकार में मंत्री रहे मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने BNP सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आवामी लीग बदले की राजनीति में विश्वास नहीं करती और उसकी प्राथमिकता न्याय तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती है।

नौफेल ने कहा, “हम बदला नहीं चाहते, हम सिर्फ इंसाफ चाहते हैं। हम अपील करते हैं कि बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा न दिया जाए। हम बांग्लादेश को एक फेल्ड स्टेट नहीं बनने देना चाहते।”

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में असहिष्णुता और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है, जिसका असर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ रहा है।

धार्मिक कट्टरवाद पर जताई चिंता

कार्यक्रम में मौजूद अन्य आवामी लीग नेताओं ने भी धार्मिक कट्टरवाद और राजनीतिक हिंसा पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि बांग्लादेश की स्थापना धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर हुई थी और इन मूल्यों को कमजोर नहीं होने दिया जाना चाहिए।

नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर नजर रखे और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन करे।

राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा संबोधन

विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना का यह संबोधन केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसे आवामी लीग के राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ते तनाव और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए उनके बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी को लेकर कोई आधिकारिक समयसीमा सामने नहीं आई है, लेकिन उनके ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह सक्रिय राजनीति से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। आने वाले समय में आवामी लीग और BNP के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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