नई दिल्ली: देश में खाद्य महंगाई का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई पर दिखाई देने लगा है। जुलाई महीने में घर पर तैयार होने वाली वेज थाली की लागत सालाना आधार पर 4 प्रतिशत और नॉन-वेज थाली की लागत 9 प्रतिशत बढ़ गई। क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह प्याज, खाद्य तेल, रसोई गैस और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ी हुई कीमतें हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में वेज थाली की लागत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण प्याज के दाम में आई तेज बढ़ोतरी रही। प्याज की कीमतें पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत बढ़ी हैं, जबकि खाद्य तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत और रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन तीनों वस्तुओं की महंगाई ने घरेलू भोजन की कुल लागत पर बड़ा असर डाला है।
नॉन-वेज थाली की लागत में और भी ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 14 प्रतिशत की वृद्धि ने नॉन-वेज थाली को और महंगा बना दिया। चूंकि नॉन-वेज थाली की कुल लागत में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा चिकन का होता है, इसलिए चिकन की कीमतों में हुई वृद्धि का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है।
क्रिसिल ने बताया कि प्याज की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने की एक बड़ी वजह पुराने स्टॉक की महंगी आपूर्ति रही। इसके अलावा महाराष्ट्र में मार्च और अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने प्याज की फसल और उसके भंडारण को प्रभावित किया, जिससे बाजार में आपूर्ति पर दबाव बना रहा।
खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति संबंधी बाधाएं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को प्रमुख कारण माना गया है। ऊर्जा कीमतों में तेजी का असर एलपीजी की लागत पर पड़ा, जबकि खाद्य तेलों के वैश्विक बाजार में अस्थिरता के कारण घरेलू कीमतें ऊंची बनी रहीं।
हालांकि, कुछ राहत देने वाली खबर भी सामने आई है। आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट के कारण थाली की लागत में बढ़ोतरी का असर कुछ हद तक कम हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, आलू के दाम सालाना आधार पर 12 प्रतिशत घटे, जबकि टमाटर की कीमतों में 2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
आलू की कीमतों में गिरावट का कारण बेहतर उत्पादन और अधिक बुवाई क्षेत्र रहा। वहीं, टमाटर की कीमतें देरी से बुवाई के बावजूद जुलाई में बाजार में अधिक आवक होने के कारण नियंत्रण में रहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में घरेलू भोजन की लागत पर दबाव बना रह सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है।
क्रिसिल की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि खाद्य महंगाई का असर केवल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह सीधे घर की थाली पर दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में कृषि उत्पादन, आपूर्ति व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिति पर थाली की लागत काफी हद तक निर्भर करेगी।

