17 Oct 2026, Sat

रात में सोते समय सुन्न हो जाते हैं हाथ? भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं ये कारण

रात में सोते समय अचानक हाथों का सुन्न हो जाना, झनझनाहट महसूस होना या उंगलियों में चींटियां चलने जैसा एहसास होना एक आम समस्या है। कई बार लोग इसे सोने की गलत पोजीशन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आमतौर पर हाथ या बांह पर दबाव पड़ने से ऐसा हो सकता है, लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की भूमिका भी हो सकती है।

गलत पोजीशन में सोना हो सकता है मुख्य कारण

सोते समय एक ही करवट में लंबे समय तक रहना, हाथ को सिर के नीचे दबाना या कोहनी को ज्यादा मोड़कर रखना नसों पर दबाव डाल सकता है। इससे हाथों में कुछ समय के लिए सुन्नपन और झनझनाहट महसूस हो सकती है। अक्सर पोजीशन बदलने और हाथ को धीरे-धीरे हिलाने से राहत मिल जाती है।

हालांकि, यदि हाथों का सुन्न होना नियमित रूप से हो रहा है, तो केवल सोने की स्थिति को इसका कारण मानना सही नहीं है। ऐसी स्थिति में दूसरे संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए।

गर्दन की समस्या से भी हो सकती है परेशानी

गर्दन की हड्डियों या उनके बीच मौजूद डिस्क में बदलाव आने से हाथों तक जाने वाली नसों पर दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में गर्दन से कंधे और बांह तक दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को हाथों में कमजोरी भी महसूस होती है।

यदि हाथ सुन्न होने के साथ गर्दन में दर्द, कंधे में खिंचाव या उंगलियों को चलाने में परेशानी हो, तो चिकित्सकीय जांच करवाना जरूरी है।

डायबिटीज और कार्पल टनल सिंड्रोम भी हो सकते हैं कारण

डायबिटीज के कारण शरीर की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसके लक्षणों में सुन्नपन, जलन, दर्द और झनझनाहट शामिल हो सकते हैं। यह समस्या हाथों के अलावा पैरों में भी दिखाई दे सकती है।

इसके अलावा, कलाई में मौजूद नस पर दबाव पड़ने से कार्पल टनल सिंड्रोम हो सकता है। इसमें विशेष रूप से अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा उंगली में सुन्नपन या झनझनाहट महसूस हो सकती है। कई लोगों में इसके लक्षण रात के समय अधिक परेशान करते हैं।

हाथ सुन्न होने पर क्या करें?

इस समस्या से बचने के लिए सोते समय हाथों को शरीर के नीचे दबाकर रखने से बचें। गर्दन, कलाई और कोहनी को आरामदायक स्थिति में रखें। लंबे समय तक कोहनी मोड़कर सोने की आदत से भी बचें। यदि हाथ सुन्न हो जाए, तो पोजीशन बदलें और हाथ को धीरे-धीरे हिलाएं।

बार-बार होने वाले सुन्नपन को नजरअंदाज न करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें और जांच के बाद ही उपचार शुरू करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के विटामिन सप्लीमेंट या दवाएं लेना उचित नहीं है।

कब तुरंत चिकित्सा सहायता लें?

यदि हाथों में सुन्नपन लगातार बना रहता है, बार-बार लौटता है या उसके साथ कमजोरी और दर्द होता है, तो डॉक्टर से जांच करवाएं। वहीं, यदि अचानक हाथ सुन्न होने के साथ चेहरे का एक हिस्सा लटकने लगे, बोलने में परेशानी हो या शरीर के एक तरफ कमजोरी महसूस हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

ध्यान रखें: कभी-कभार होने वाला सुन्नपन गलत पोजीशन के कारण हो सकता है, लेकिन बार-बार होने वाली परेशानी शरीर में किसी समस्या का संकेत भी हो सकती है। सही समय पर जांच करवाना जरूरी है।

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