25 Apr 2026, Sat

राघव चड्ढा सहित AAP के सात सांसदों ने छोड़ा पार्टी का साथ, तीन BJP में शामिल, सियासत हुई तेज, जानें किसने क्या कहा

AAP को बड़ा झटका: सात राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा, तीन ने जॉइन की BJP, सियासत गरमाई

नई दिल्ली: देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) को गहरा झटका लगा है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया, जिनमें से तीन नेताओं ने तुरंत भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दलों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

इन इस्तीफों में सबसे चर्चित नाम राघव चड्ढा का है, जिनके साथ कई अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ी। अचानक हुए इस बड़े राजनीतिक बदलाव ने AAP की रणनीति और आंतरिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस घटनाक्रम पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के नेता टीकेएस एलंगोवन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए BJP पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसदों और विधायकों को तोड़ने का काम करती है और सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।

वहीं BJP नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए AAP पर ही निशाना साधा। भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को अपने खर्चों और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल का हिसाब देना चाहिए। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि क्या नेताओं के पार्टी छोड़ने के पीछे भ्रष्टाचार ही वजह है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने भी AAP नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में पारदर्शिता की कमी है और यही कारण है कि वरिष्ठ नेता अब पार्टी से दूरी बना रहे हैं।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी (SP) ने इस पूरे घटनाक्रम को दुखद बताया। पार्टी के प्रवक्ता डॉ. आशुतोष वर्मा ने कहा कि यह AAP के लिए आत्ममंथन का समय है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी ने शुरुआत में आम लोगों और कमजोर वर्गों की राजनीति की बात की थी, तो अब राज्यसभा में उन्हीं वर्गों के प्रतिनिधित्व की कमी क्यों दिख रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर सांसदों का पार्टी छोड़ना किसी भी दल के लिए गंभीर संकेत होता है। इससे न केवल संगठन की मजबूती पर असर पड़ता है, बल्कि आगामी चुनावों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, AAP के सात सांसदों का इस्तीफा और तीन का BJP में शामिल होना भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि AAP इस संकट से कैसे उबरती है और आने वाले समय में अपनी रणनीति को किस तरह बदलती है।

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