17 Jul 2026, Fri

रथ यात्रा के दौरान रिलीज नहीं होगी एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को रथ यात्रा के दौरान तुरंत रिलीज करने की अनुमति नहीं दी है। हालांकि, फिल्म निर्माताओं को बड़ी राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि रथ यात्रा से जुड़े उत्सव समाप्त होने के बाद फिल्म को पूरे देश में रिलीज किया जा सकता है। अदालत के आदेश के अनुसार फिल्म 28 जुलाई 2026 या उसके बाद सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जा सकेगी।

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि फिल्म पहले से यूट्यूब पर उपलब्ध एक वेब सीरीज पर आधारित है। अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC से प्रमाणपत्र मिल चुका है। इसके बाद पीठ ने रथ यात्रा समाप्त होने के बाद फिल्म की अखिल भारतीय रिलीज की अनुमति दे दी।

17 जुलाई को रिलीज होने वाली थी फिल्म

‘महाप्रभु जगन्नाथ’ को पहले 17 जुलाई 2026 को हिंदी, ओड़िया और तेलुगु भाषाओं में सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था। रिलीज से कुछ समय पहले ओडिशा हाई कोर्ट ने फिल्म के प्रदर्शन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद निर्माता कंपनी एली एनिमेशंस प्राइवेट लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की मांग की।

ओडिशा सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा ओडिशा और देश के अन्य हिस्सों में शुरू हो चुकी है। धार्मिक उत्सव की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने फिल्म को यात्रा समाप्त होने से पहले रिलीज करने की अनुमति नहीं दी।

क्यों शुरू हुआ फिल्म पर विवाद?

इस फिल्म के खिलाफ महेश कुमार साहू, डॉ. प्रमोद कुमार आचार्य और उमाशंकर आचार्य ने ओडिशा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने फिल्म को दिए गए CBFC प्रमाणपत्र को रद्द करने और ओडिशा में इसके सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी।

याचिका में फिल्म के अंदर भगवान जगन्नाथ के कथित काल्पनिक बचपन, संवादों, साहसिक घटनाओं और युद्ध के दृश्यों पर आपत्ति जताई गई। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि ये दृश्य स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और श्री जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी प्राचीन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। उनका कहना था कि ऐसे चित्रण से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है।

हाई कोर्ट ने जताई थी शांति व्यवस्था की चिंता

ओडिशा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति मुराहरी श्री रमन की खंडपीठ ने 15 जुलाई को फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाई थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है, लेकिन धार्मिक विषयों से जुड़े चित्रण का समाज और सार्वजनिक शांति पर पड़ने वाला प्रभाव भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

फिल्म निर्माताओं ने अपने बचाव में कहा कि ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ एक काल्पनिक एनिमेटेड प्रस्तुति है और इसका उद्देश्य किसी धर्म, परंपरा या श्रद्धालु की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। निर्माताओं के अनुसार फिल्म बच्चों और परिवारों को भगवान जगन्नाथ की संस्कृति एवं भक्ति से परिचित कराने के उद्देश्य से बनाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब फिल्म के निर्माताओं के लिए रिलीज का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन उन्हें 28 जुलाई तक प्रतीक्षा करनी होगी। फिल्म की नई आधिकारिक रिलीज तारीख की घोषणा निर्माता कंपनी द्वारा किए जाने की संभावना है।

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