जाने-माने फिल्मकार महेश भट्ट एक बार फिर रंगमंच की दुनिया में वापसी करने जा रहे हैं। उनकी नई नाट्य प्रस्तुति ‘वो सुबह हम ही से आएगी’ का प्रीमियर 5 जुलाई को मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित मुक्ति ऑडिटोरियम में होगा। इस नाटक का निर्देशन तारीकी हामीद ने किया है, जबकि इसकी कहानी मशहूर टीवी पत्रकार और नाटककार दिनेश गौतम ने लिखी है। नाटक में इमरान जाहिद और नमिता सचदेवा मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
‘वो सुबह हम ही से आएगी’ की एक खास बात इसका संगीत भी है, जिसे संगीतकार अनु मलिक ने तैयार किया है। महेश भट्ट के अनुसार, अनु मलिक के पास भावनाओं को धुन में बदलने की अद्भुत क्षमता है। उन्होंने संगीत को इस नाटक की धड़कन बताते हुए कहा कि कहानी के भावनात्मक प्रभाव को और गहरा बनाने में इसकी अहम भूमिका होगी।
रंगमंच को ईमानदार माध्यम मानते हैं महेश भट्ट
रंगमंच पर अपनी वापसी को लेकर महेश भट्ट ने कहा कि थिएटर कलाकार के सामने किसी भी तरह का पर्दा नहीं रहने देता। यहां न तो रीटेक का मौका मिलता है और न ही तकनीक के सहारे कमियों को छिपाया जा सकता है। उनके मुताबिक, मंच पर कलाकार सीधे दर्शकों के सामने होता है और यही अभिनय का सबसे सच्चा तथा ईमानदार रूप है।
महेश भट्ट ने नाटक के लेखक दिनेश गौतम की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दिनेश के लेखन में बनावटीपन या उपदेश देने की कोशिश नहीं होती। उनकी कहानियों में साधारण लोगों के असाधारण संघर्षों और गहरी मानवीय भावनाओं को बेहद सरलता से प्रस्तुत किया जाता है। यही सादगी उन्हें बार-बार दिनेश के लेखन की ओर आकर्षित करती है।
इमरान जाहिद के समर्पण की तारीफ
अभिनेता इमरान जाहिद लंबे समय से महेश भट्ट की कई नाट्य प्रस्तुतियों से जुड़े रहे हैं। उनके बारे में महेश भट्ट का कहना है कि प्रतिभा बहुत से लोगों में होती है, लेकिन कला के प्रति समर्पण दुर्लभ होता है। उन्होंने इमरान को ऐसा कलाकार बताया, जिसने लंबे समय से रंगमंच के प्रति अपनी निष्ठा और प्रतिबद्धता बनाए रखी है।
1990 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी
नाटक की कहानी दर्शकों को 1990 के दशक में लेकर जाती है। यह वह दौर था, जब देश और समाज कई तरह के बदलावों और उथल-पुथल से गुजर रहे थे। कहानी एक ऐसे युवा के जीवन पर आधारित है, जिसकी आंखों में बड़े सपने हैं और जो अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कभी हार नहीं मानता।
अपने सफर के दौरान वह प्रेम, विरह, दुख, खुशी, असफलता और संघर्ष के कई पड़ावों से गुजरता है। धीरे-धीरे उसे महसूस होता है कि वास्तविक सफलता केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, सच्चा और ईमानदार इंसान बनने में है।
निर्देशक तारीकी हामीद के मुताबिक, अच्छे थिएटर को बड़े और भव्य सेट की नहीं, बल्कि ईमानदार अभिनय की जरूरत होती है। लेखक दिनेश गौतम ने इस नाटक को उन साधारण लोगों को समर्पित किया है, जो बार-बार असफल होने के बावजूद नए सपने देखने का साहस जुटाते हैं। इससे पहले महेश भट्ट, इमरान जाहिद और दिनेश गौतम ‘डैडी’, ‘अर्थ’, ‘हमारी अधूरी कहानी’ और ‘बात निकलेगी तो’ जैसी प्रस्तुतियों पर साथ काम कर चुके हैं।

