12 Jun 2026, Fri

‘ये खबर पूरी तरह गलत, मैं दिल्ली गई ही नहीं’, TMC की बागी सांसदों की लिस्ट में अपना नाम देखकर भड़कीं प्रतिमा मंडल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों सत्ताधारी पार्टी टीएमसी को लेकर अंदरूनी असंतोष और कथित बगावत की खबरें सुर्खियों में हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कई सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और अलग रुख अपना रहे हैं। हालांकि, पार्टी के कई नेताओं ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है और इसे पूरी तरह भ्रामक बताया है।

All India Trinamool Congress के भीतर कथित फूट की खबरों के बीच पार्टी की वरिष्ठ सांसद Pratima Mondal ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनका नाम जिस ‘बागी सांसदों’ की सूची में बताया जा रहा है, वह पूरी तरह गलत और निराधार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह पार्टी के साथ हैं और किसी भी तरह की बगावत या अलग गुट से उनका कोई संबंध नहीं है।

प्रतिमा मंडल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह घटना के समय कोलकाता में थीं और दिल्ली में किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं हुईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह 4 जून को निर्धारित संसदीय समिति की बैठक में शामिल हुई थीं और उसी दिन शाम को कोलकाता लौट आई थीं। उनके अनुसार, इसके बाद से वह दिल्ली नहीं गई हैं, इसलिए उनके नाम पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह गलत हैं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की बात की जा रही है, उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा। उनके अनुसार, यदि किसी दस्तावेज में उनका नाम शामिल होने का दावा किया जा रहा है, तो उसे सामने लाया जाना चाहिए ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से भ्रामक प्रचार करार दिया।

इस बीच, पार्टी के कुछ अन्य सांसदों के नाम को लेकर भी अटकलें तेज हैं, जिनमें अभिनेता से नेता बने Shatrughan Sinha का नाम भी चर्चा में रहा। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उनका नाम भी कथित ‘बागी सूची’ में शामिल है, लेकिन सूत्रों के अनुसार उन्होंने किसी भी तरह के हस्ताक्षर नहीं किए हैं क्योंकि वे उस समय दिल्ली में मौजूद नहीं थे। हालांकि इस पूरे मामले पर शत्रुघ्न सिन्हा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलों को और बढ़ावा मिला है।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर मतभेदों को लेकर चल रही चर्चाएं अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। जहां एक तरफ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पार्टी के भीतर असंतोष और विभाजन के संकेत बताए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कई नेता इन दावों को खारिज करते हुए इसे अफवाह करार दे रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद अक्सर दलों के भीतर रणनीतिक मतभेद और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। हालांकि इसे ‘फूट’ कहना जल्दबाजी हो सकती है, जब तक कि किसी भी तरह का आधिकारिक बयान या ठोस राजनीतिक कदम सामने न आए।

फिलहाल Mamata Banerjee ने इस पूरे विवाद पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, जिससे राजनीतिक हलकों में और भी अटकलें तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है, जब पार्टी की ओर से आधिकारिक रुख सामने आएगा।

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