23 Jun 2026, Tue

‘यह है कंसल्टेंट की जिंदगी!’ लड़की ने बताई अकाउंटिंग फर्म के अंदर की टॉक्सिक सच्चाई, Video हुआ वायरल

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने देश की प्रतिष्ठित बिग फोर कंसल्टिंग और अकाउंटिंग फर्मों में काम करने के अनुभव को साझा किया है। वीडियो सामने आने के बाद कॉर्पोरेट जगत में वर्क-लाइफ बैलेंस, लंबे काम के घंटे और कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

वीडियो में प्रोफेशनल ने बिग फोर कंपनियों के भीतर की कार्य संस्कृति को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि इन प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करना जितना आकर्षक बाहर से दिखाई देता है, वास्तविकता कई बार उससे काफी अलग होती है।

सप्ताहांत में भी दफ्तर पहुंची प्रोफेशनल

वायरल वीडियो की शुरुआत शनिवार सुबह के एक लगभग खाली ऑफिस से होती है। जहां ज्यादातर लोग अपने सप्ताहांत का आनंद ले रहे थे, वहीं प्रोफेशनल एक क्लाइंट मीटिंग की तैयारी करती दिखाई देती हैं।

वीडियो में उन्होंने बताया कि सप्ताहांत में काम करना, देर रात तक दफ्तर में रुकना और लगातार यात्रा करना इस पेशे का सामान्य हिस्सा बन चुका है।

उनका कहना है कि कई युवा प्रोफेशनल्स बिग फोर कंपनियों से जुड़ी प्रतिष्ठा, वेतन और ब्रांड वैल्यू से प्रभावित होकर इस क्षेत्र में कदम रखते हैं, लेकिन वास्तविक कार्य परिस्थितियां उनकी अपेक्षाओं से काफी अलग हो सकती हैं।

‘सपनों की नौकरी’ की सच्चाई बताने की कोशिश

वीडियो के साथ साझा किए गए संदेश में प्रोफेशनल ने बताया कि यह फुटेज कुछ महीने पहले रिकॉर्ड की गई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौरान कई बार उन्होंने खुद से सवाल किया कि क्या जिस करियर को पाने के लिए उन्होंने वर्षों मेहनत की, वह वास्तव में वही जीवन है जिसकी उन्होंने कल्पना की थी।

उन्होंने कहा कि बाहर से आकर्षक दिखाई देने वाली कॉर्पोरेट नौकरियों के पीछे कई ऐसी चुनौतियां होती हैं, जो आमतौर पर लोगों को दिखाई नहीं देतीं।

हालांकि, उन्होंने अपने अनुभव को पूरी तरह नकारात्मक भी नहीं बताया।

पेशे से मिली सीख को भी बताया महत्वपूर्ण

प्रोफेशनल ने कहा कि बिग फोर कंपनियों में काम करने से उन्हें कई महत्वपूर्ण पेशेवर कौशल सीखने का अवसर मिला। इनमें लचीलापन, प्रोफेशनलिज्म, क्लाइंट मैनेजमेंट और दबाव में काम करने की क्षमता प्रमुख हैं।

उनका कहना है कि उच्च दबाव वाले माहौल में काम करने से सीखने की प्रक्रिया तेज होती है और करियर के शुरुआती चरण में यह अनुभव काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संस्था की आलोचना करना नहीं, बल्कि युवा पेशेवरों को वास्तविकता से अवगत कराना है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने कहा कि वीडियो में दिखाई गई स्थिति कॉर्पोरेट दुनिया की वास्तविक तस्वीर पेश करती है।

एक यूजर ने इसे “रियलिटी चेक” बताते हुए कहा कि कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले अधिकांश लोग इन चुनौतियों का सामना करते हैं।

दूसरे यूजर ने कहा कि कोई भी वेतन व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से अधिक महत्वपूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि करियर के साथ-साथ वित्तीय योजना, बचत और वैकल्पिक करियर विकल्पों पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि जीवन केवल ऑफिस, प्रेजेंटेशन और एक्सेल शीट तक सीमित नहीं है।

वर्क-लाइफ बैलेंस पर बढ़ रही चर्चा

पिछले कुछ वर्षों में कॉर्पोरेट क्षेत्र में कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्य के घंटे और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा तेज हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थानों को कर्मचारियों की उत्पादकता के साथ-साथ उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।

वहीं, करियर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पेशे को चुनने से पहले उसके सकारात्मक और चुनौतीपूर्ण दोनों पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में अपेक्षाओं और वास्तविकता के बीच संतुलन बनाया जा सके।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *