यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच अदन स्थित राष्ट्रपति महल पर हमला होने की खबर सामने आई है। इस हमले में दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, अदन में मौजूद सरकार के मंत्री सुरक्षित हैं और फिलहाल शहर छोड़ने की कोई योजना नहीं है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब यमन और सऊदी अरब के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में सैन्य ठिकानों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के दावे भी सामने आए हैं। इस घटनाक्रम से क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
राष्ट्रपति महल को बनाया गया निशाना
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को अदन स्थित अल-मआशिक राष्ट्रपति महल पर हमला किया गया। इस दौरान दो सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई और छह अन्य घायल हो गए। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति का जायजा लिया और परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी।
यमन के युवा मंत्री नायेफ सालेह अल-बकरी ने बताया कि अदन में मौजूद कैबिनेट के सभी मंत्री सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हमले के बावजूद सरकार के सदस्य शहर में बने रहेंगे। हालांकि, हमले से हुए नुकसान और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमले का दावा
राष्ट्रपति महल पर हमले से एक दिन पहले हूती सैन्य प्रवक्ता ने सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले करने का दावा किया था। इन ठिकानों में पूर्वी प्रांत में स्थित तेल प्रतिष्ठान, रास तनुरा रिफाइनरी और रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल बताए गए।
हूती प्रवक्ता के अनुसार, हमलों के कारण कुछ स्थानों पर नुकसान हुआ और आग लगने की घटनाएं सामने आईं। संगठन ने आने वाले दिनों में भी अभियान जारी रखने की चेतावनी दी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए हमलों से हुए वास्तविक नुकसान का आकलन करना फिलहाल संभव नहीं है।
सऊदी गठबंधन की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी सना में हूतियों के नियंत्रण वाले इलाके में स्थित एक तेल कंपनी के स्टेशन को खाली करने की चेतावनी दी थी। गठबंधन ने संभावित सैन्य कार्रवाई से पहले नागरिकों को परिसर से दूर रहने की अपील की थी।
गठबंधन ने यह भी दावा किया कि दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया गया। इसके अलावा, रियाद के उत्तर में तीन ड्रोन निष्क्रिय करने की जानकारी दी गई। दूसरी ओर, हूतियों ने सऊदी टोही विमान को मार गिराने का दावा किया। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लाल सागर के व्यापार मार्गों पर बढ़ी चिंता
यमन में जारी संघर्ष का असर क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के महत्वपूर्ण मार्ग हैं। यहां सुरक्षा संबंधी किसी भी बड़े घटनाक्रम से जहाजों की आवाजाही, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
यमन में संघर्ष वर्ष 2014 में तेज हुआ था, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। ताजा हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।

