मुंबई: मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) ने अपनी लीज पर दी गई सरकारी जमीनों का किराया लंबे समय से नहीं चुकाने वाले लीजधारकों और किराएदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि बकाया रकम की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी। इसके साथ ही, बिना अनुमति सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों और नियमों का उल्लंघन करने वाले किराएदारों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
MbPA का कहना है कि लीज किराए के रूप में बड़ी रकम लंबे समय से बकाया है, जिससे बंदरगाह से जुड़े महत्वपूर्ण सार्वजनिक विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में कठिनाई हो रही है। यही कारण है कि अथॉरिटी ने अब कानूनी रणनीति को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।
मैरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा
मुंबई पोर्ट अथॉरिटी इस समय केंद्र सरकार के ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ और ‘मैरीटाइम इंडिया विजन’ के तहत कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं में ‘विकसित भारत मुंबई मरीना’, आधुनिक क्रूज टर्मिनल, समुद्री पर्यटन सुविधाएं, जल परिवहन नेटवर्क और अन्य बंदरगाह आधारित विकास कार्य शामिल हैं।
अथॉरिटी का लक्ष्य मुंबई को वैश्विक समुद्री व्यापार और पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। अधिकारियों का कहना है कि यदि बकाया राशि समय पर प्राप्त होती है तो इन परियोजनाओं को और तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख
MbPA के अनुसार, कई किराएदारों ने लीज की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया है। इनमें बिना अनुमति निर्माण करना, संपत्ति को अवैध रूप से सबलेट करना, बिना मंजूरी स्वामित्व या उपयोग का हस्तांतरण करना तथा जमीन के उपयोग में अनधिकृत बदलाव जैसे मामले शामिल हैं।
अथॉरिटी का कहना है कि ऐसे उल्लंघन केवल अनुबंध की शर्तों का ही उल्लंघन नहीं हैं, बल्कि बंदरगाह की सुरक्षा, सार्वजनिक हित और वैध व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हैं। इसलिए ऐसे मामलों में आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
₹3,500 करोड़ से अधिक की बकाया राशि
मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने उन प्रमुख कंपनियों और संस्थाओं की पहचान की है, जिन पर कुल मिलाकर लगभग 3,500 करोड़ रुपये का बकाया है। अथॉरिटी के अनुसार, बकाया राशि वाले प्रमुख नामों में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड, क्रिसेंट डाइज एंड केमिकल्स लिमिटेड, टिम्बर मार्केट ऑक्यूपेंट्स सोसाइटी, प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड, इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट लिमिटेड, सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी लिमिटेड और शुभ हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड शामिल हैं।
बकाया राशि की वसूली के लिए अथॉरिटी ने वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों और प्रमुख लॉ फर्मों की सेवाएं ली हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।
किराएदारों से नियमों का पालन करने की अपील
मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने सभी लीजधारकों और किराएदारों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपना बकाया किराया जमा करें और लीज से जुड़े सभी नियमों एवं शर्तों का पालन करें। अथॉरिटी ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी को अनावश्यक परेशानी देना नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।
MbPA ने दोहराया कि वह मुंबई के ईस्टर्न वॉटरफ्रंट के पुनर्विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अथॉरिटी का मानना है कि बकाया राशि की समय पर वसूली और अवैध कब्जों को हटाने से शहर के विकास को नई गति मिलेगी और भविष्य की समुद्री एवं शहरी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।

