मिर्जापुर की दुनिया में कदम रखते ही बंदूक, बदला, सत्ता, खून-खराबा और देसी अंदाज का भौकाल देखने को मिलता है। लंबे समय तक दर्शकों का मनोरंजन करने के बाद अब यह दुनिया बड़े पर्दे पर पहुंच गई है। ‘मिर्जापुर द मूवी’ पुराने किरदारों और नए अंदाज के साथ दर्शकों के सामने आती है। फिल्म में वही पुराना तेवर बरकरार है, लेकिन बड़े पर्दे पर एक्शन और टकराव को पहले से ज्यादा भव्य बनाने की कोशिश की गई है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका माहौल और इसके किरदार हैं। कहानी शुरू होते ही दर्शक खुद को उसी दुनिया में महसूस करने लगते हैं, जहां सत्ता हासिल करना ही सबसे बड़ी जंग है। पुराने किरदारों की मौजूदगी कहानी में पुरानी यादें ताजा करती है, वहीं नए किरदार घटनाक्रम में अलग तरह का तनाव पैदा करते हैं।
कैसी है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी मिर्जापुर की गद्दी, सत्ता और उसके लिए होने वाली खींचतान के इर्द-गिर्द घूमती है। यहां रिश्ते भी जरूरत के हिसाब से बदलते हैं और दोस्ती-दुश्मनी के बीच की लकीर कभी भी मिट सकती है। कहानी में बदला लेने की चाह, परिवार की महत्वाकांक्षा और सत्ता पर कब्जे की लड़ाई लगातार आगे बढ़ती रहती है।
फिल्म की टाइमलाइन और घटनाओं को जिस तरह पेश किया गया है, वह पुराने दर्शकों के लिए दिलचस्प है। कई जाने-पहचाने चेहरे फिर से नजर आते हैं, जिससे कहानी में नॉस्टेलजिया का तड़का लगता है। हालांकि फिल्म को पूरी तरह समझने और किरदारों के रिश्तों से जुड़ने के लिए पिछली कहानी से परिचित होना काफी मददगार साबित होता है।
अभिनय में किसने मारी बाजी?
फिल्म का अभिनय इसका मजबूत पक्ष है। पंकज त्रिपाठी अपने अंदाज में एक बार फिर प्रभाव छोड़ते हैं। उनके किरदार में ठहराव, रौब और खतरनाक शांति दिखाई देती है। दूसरी तरफ रवि किशन का अंदाज फिल्म में अलग ऊर्जा लेकर आता है। उनका देसी स्वैग और संवाद बोलने का तरीका कई दृश्यों को खास बना देता है।
अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। खासकर आमने-सामने वाले दृश्यों में कलाकारों की केमिस्ट्री और संवाद अदायगी दर्शकों को बांधे रखती है।
एक्शन और मनोरंजन
बड़े पर्दे पर फिल्म का एक्शन इसकी खासियत है। गोलीबारी, मारधाड़ और टकराव वाले दृश्यों को सिनेमाघर के हिसाब से तैयार किया गया है। कई जगह बैकग्राउंड म्यूजिक और स्क्रीन पर होने वाला एक्शन मिलकर माहौल को काफी प्रभावशाली बना देते हैं।
हालांकि फिल्म की लंबाई कुछ जगह परेशानी पैदा करती है। कहानी कई मौकों पर जरूरत से ज्यादा खिंचती हुई महसूस होती है और रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ जाती है। खासकर बीच के हिस्से में संपादन थोड़ा और चुस्त होता तो फिल्म का प्रभाव ज्यादा मजबूत हो सकता था।
क्लाइमैक्स ने किया थोड़ा निराश
फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसका क्लाइमैक्स लगता है। जिस तरह से कहानी अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ती है, उससे उम्मीदें काफी बढ़ जाती हैं, लेकिन अंत उस स्तर का असर नहीं छोड़ पाता जिसकी उम्मीद की जा रही थी। फिर भी फिल्म पूरी तरह निराश नहीं करती और अंत में आगे की कहानी की गुंजाइश छोड़ जाती है।
कैसी है फिल्म?
अगर आपको देसी क्राइम ड्रामा, दमदार संवाद, जबरदस्त किरदार और बड़े पर्दे वाला एक्शन पसंद है, तो ‘मिर्जापुर द मूवी’ एक बार देखी जा सकती है। फिल्म में कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन यह इतनी उबाऊ नहीं है कि दर्शक बोर हो जाए। पुराने भौकाल, कलाकारों की दमदार अदाकारी और एक्शन के कारण फिल्म मनोरंजन करने में कामयाब रहती है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐/5

