नई दिल्ली: भारतीय रसोई में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। आधुनिक किचन में स्टील, एल्यूमीनियम और नॉन-स्टिक बर्तनों के बढ़ते चलन के बावजूद मिट्टी के बर्तनों की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इनमें पकने वाले भोजन का अनोखा स्वाद और मिट्टी की सोंधी खुशबू। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच भी लोग अब फिर से पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों की ओर लौट रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि नए मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल सीधे खाना बनाने के लिए नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से बर्तन में दरार पड़ सकती है या वह टूट भी सकता है।
मिट्टी के बर्तन प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं, इसलिए इनमें छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। यदि इन्हें बिना तैयारी के तेज आंच पर रखा जाए तो तापमान में अचानक बदलाव के कारण बर्तन क्षतिग्रस्त हो सकता है। यही वजह है कि पहली बार उपयोग से पहले मिट्टी के बर्तन को सही तरीके से तैयार करना बेहद जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नए मिट्टी के बर्तन को सबसे पहले पूरी रात पानी में भिगोकर रखना चाहिए। यदि बर्तन बड़ा है तो उसमें पानी भरकर भी रखा जा सकता है। इससे मिट्टी में पर्याप्त नमी पहुंचती है और बर्तन मजबूत बनता है। पानी मिट्टी के सूक्ष्म छिद्रों में समा जाता है, जिससे खाना पकाते समय दरार आने की संभावना कम हो जाती है।
अगले चरण में बर्तन को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है। रातभर पानी में रखने के बाद सुबह उसका पानी निकाल दें और उसे साफ जगह पर धूप में रख दें। कम से कम तीन से चार घंटे तक धूप में सुखाने से अतिरिक्त नमी निकल जाती है और बर्तन उपयोग के लिए तैयार होने लगता है।
इसके बाद बर्तन पर सरसों का तेल लगाने की सलाह दी जाती है। बर्तन के अंदर और बाहर दोनों तरफ हल्की परत में तेल लगाकर उसे दोबारा कुछ घंटों के लिए धूप में रखा जाता है। माना जाता है कि इससे मिट्टी की सतह मजबूत होती है और बर्तन की उम्र बढ़ती है। साथ ही खाना पकाने के दौरान तापमान का प्रभाव भी कम पड़ता है।
जब पहली बार मिट्टी के बर्तन में खाना बनाएं, तो सीधे तेज आंच का उपयोग न करें। बर्तन को धीमी आंच पर धीरे-धीरे गर्म होने दें। लगभग 10 से 15 मिनट तक स्लो फ्लेम पर रखने से बर्तन तापमान के अनुरूप खुद को ढाल लेता है। इसके बाद ही उसमें खाना पकाना शुरू करना चाहिए।
रसोई विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि मिट्टी के बर्तन में खाना बनाते समय ठंडे पानी की जगह गुनगुने या गर्म पानी का उपयोग करें। अचानक तापमान परिवर्तन से बर्तन कमजोर पड़ सकता है। इसके अलावा खाना बनने के बाद भी बर्तन को तुरंत ठंडे पानी से नहीं धोना चाहिए।
मिट्टी के बर्तन में पका भोजन न केवल स्वादिष्ट माना जाता है, बल्कि कई लोग इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानते हैं। सही तरीके से उपयोग और देखभाल करने पर ये बर्तन लंबे समय तक चलते हैं और भोजन को पारंपरिक स्वाद प्रदान करते हैं। इसलिए यदि आप पहली बार मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने जा रहे हैं, तो इन जरूरी सावधानियों को अपनाकर सुरक्षित और बेहतर अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

