नई दिल्ली: मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। बारिश के दिनों में जलभराव, नमी और गंदगी के कारण मच्छर, बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, चिकनगुनिया और अन्य संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं।
अक्सर लोग बुखार आने पर इसे सामान्य वायरल फीवर मानकर घर पर ही दवा लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन यदि बुखार लगातार तीन दिनों तक बना रहे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह किसी गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है और समय पर जांच कराना जरूरी है।
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम की डॉ. नेहा रस्तोगी (सीनियर कंसल्टेंट, संक्रामक रोग विभाग) के अनुसार, तीन दिन या उससे अधिक समय तक रहने वाला बुखार केवल वायरल संक्रमण नहीं भी हो सकता। खासकर यदि बुखार के साथ तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी, दस्त, अत्यधिक कमजोरी या ठंड लगना जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
लेप्टोस्पायरोसिस की जांच क्यों जरूरी हो सकती है?
डॉ. रस्तोगी के मुताबिक, मानसून के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस नामक बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। यह संक्रमण संक्रमित जानवरों, विशेष रूप से चूहों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलता है। बारिश के मौसम में गंदे पानी और जलभराव वाले क्षेत्रों में चलने से इसका जोखिम काफी बढ़ जाता है।
यह बीमारी शुरुआती चरण में डेंगू, मलेरिया या वायरल फीवर जैसी लग सकती है। इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, आंखों का लाल होना और थकान शामिल हैं। गंभीर मामलों में यह संक्रमण किडनी, लिवर और फेफड़ों को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे पीलिया, सांस लेने में तकलीफ और अंगों के काम करने में समस्या जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
कब कराएं टेस्ट?
यदि पिछले कुछ दिनों में आपको गंदे या रुके हुए पानी में चलना पड़ा हो, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहना पड़ा हो या संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने की संभावना रही हो, तो डॉक्टर लेप्टोस्पायरोसिस की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
इस संक्रमण की पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। साथ ही डॉक्टर डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों की जांच भी लिख सकते हैं, ताकि बुखार के सही कारण का पता लगाया जा सके।
समय पर इलाज है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बैक्टीरियल बीमारी में समय पर एंटीबायोटिक उपचार शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवा लेना या केवल बुखार की गोली खाकर इंतजार करना सही नहीं है।
मानसून के दौरान बुखार होने पर पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच व इलाज कराना जरूरी है। यदि बुखार तीन दिन से अधिक बना रहे या लक्षण गंभीर हों, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं। समय पर सही निदान और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

