आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज हो गई है। अब इस बहस को और गंभीर बना दिया है माइक्रोसॉफ्ट के AI डिवीजन प्रमुख Mustafa Suleyman के हालिया बयान ने। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले 12 से 18 महीनों में दफ्तरों में होने वाले कई काम AI की वजह से या तो पूरी तरह बदल जाएंगे या फिर पूरी तरह खत्म हो सकते हैं।
मुस्तफा सुलेमान के मुताबिक, आने वाले समय में व्हाइट-कॉलर जॉब्स पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। उनका कहना है कि अकाउंटिंग, लीगल वर्क, मार्केटिंग, कस्टमर सपोर्ट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में AI तेजी से इंसानी कामों को रिप्लेस कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अब AI सिर्फ सहायक टूल नहीं रह गया है, बल्कि यह कई कामों को खुद से करने की क्षमता हासिल कर रहा है।
टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ के अनुसार, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कई कंपनियों में अब कोडिंग, टेस्टिंग और डेटा एनालिसिस जैसे कामों में AI टूल्स की मदद ली जा रही है। इससे काम की गति बढ़ रही है, लेकिन साथ ही नौकरी के भविष्य को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
सुलेमान ने आगे कहा कि साल 2027 तक स्थिति और भी बदल सकती है, जब AI एजेंट्स कंपनियों के भीतर कई फैसले खुद लेने लगेंगे। इसका मतलब है कि कई जगहों पर इंसानों की भूमिका सीमित हो सकती है और कामकाज पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम पर निर्भर हो सकता है।
AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव की वजह कंप्यूटिंग पावर और मशीन लर्निंग तकनीक में हुआ बड़ा विकास माना जा रहा है। जैसे-जैसे कंप्यूटर अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं, AI सिस्टम भी उतने ही स्मार्ट और तेज होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में खुद का AI मॉडल बनाना उतना आसान हो सकता है, जितना आज किसी ब्लॉग या वेबसाइट को शुरू करना है।
हालांकि इस तकनीक को लेकर टेक इंडस्ट्री में चिंता भी बढ़ रही है। कई बड़े टेक लीडर्स पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि AI जहां एक तरफ कई नौकरियों को प्रभावित करेगा, वहीं दूसरी तरफ नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। लेकिन यह साफ है कि आने वाले कुछ सालों में काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और लोगों को नए स्किल्स अपनाने की जरूरत होगी।

