सोशल मीडिया पर इन दिनों एक महिला की पोस्ट तेजी से चर्चा में है। महिला ने अपने करियर से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी मां को ही अपना करियर मैनेजर बना लिया था। शुरुआत में उन्हें लगा कि परिवार के किसी करीबी व्यक्ति के साथ काम करना सबसे बेहतर फैसला होगा, लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। महज दो सप्ताह बाद ही उन्हें अपनी मां को इस जिम्मेदारी से हटाना पड़ा।
महिला के मुताबिक, मां को उनकी चिंता इतनी ज्यादा थी कि वे प्रोफेशनल फैसलों को भी एक मां की नजर से देखने लगीं। इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि व्यक्तिगत रिश्ते और प्रोफेशनल जिम्मेदारियां कई बार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती हैं।
काम बढ़ने पर मां को दी जिम्मेदारी
महिला ने बताया कि एक समय उनके पास थिएटर, संगीत और दूसरे क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स से जुड़े कई काम आने लगे थे। काम बढ़ने के साथ ईमेल का जवाब देना, फीस पर बातचीत करना, कार्यक्रमों की जानकारी लेना, यात्रा और अन्य व्यवस्थाएं संभालना भी मुश्किल होने लगा था।
इसी दौरान उनकी मां के पास कुछ समय उपलब्ध था। ऐसे में मां ने खुद उनकी प्रोफेशनल गतिविधियों को संभालने की जिम्मेदारी लेने की इच्छा जताई। महिला को भी यह व्यवस्था शुरुआत में काफी अच्छी लगी। उन्हें लगा कि मां उनके काम और व्यक्तित्व को अच्छी तरह समझती हैं और उन पर पूरी तरह भरोसा किया जा सकता है।
हर मौके में मां को दिखता था खतरा
हालांकि कुछ ही दिनों में स्थिति बदलने लगी। महिला ने बताया कि उनकी मां कई ऐसे काम के प्रस्तावों को भी स्वीकार नहीं करती थीं, जिन्हें वह अपने करियर के लिए जरूरी मानती थीं। मां को देर रात होने वाले कार्यक्रम, दूसरे शहरों की यात्राएं या अपरिचित जगहों पर काम करने जैसे अवसरों को लेकर चिंता रहती थी।
महिला के मुताबिक, मां को लगता था कि उनकी बेटी को इससे बेहतर और सुरक्षित अवसर मिलना चाहिए। इसी वजह से कई प्रस्तावों को वह सीधे मना कर देती थीं। धीरे-धीरे महिला को महसूस हुआ कि उनकी मां करियर संबंधी फैसले लेने के बजाय उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं।
रिश्ते और काम के बीच अंतर समझ आया
महिला ने अपने अनुभव से बताया कि किसी करीबी व्यक्ति का बहुत ज्यादा परवाह करना हमेशा प्रोफेशनल काम के लिए फायदेमंद नहीं होता। एक मां के तौर पर उनकी मां का व्यवहार बिल्कुल स्वाभाविक था, लेकिन करियर मैनेजर के तौर पर वही रवैया कई बार मुश्किल पैदा कर रहा था।
इसके बाद महिला ने प्रोफेशनल लोगों की मदद लेने का फैसला किया। उन्होंने माना कि कलाकारों और क्रिएटिव क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए सही टीम बनाना आसान नहीं होता। शुरुआत में वे अक्सर परिवार, दोस्तों या जीवनसाथी पर भरोसा करते हैं, लेकिन समय के साथ प्रोफेशनल और निजी रिश्तों के बीच स्पष्ट सीमाएं तय करना जरूरी हो जाता है।
महिला की इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर काम और परिवार के रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई यूजर्स ने उनके अनुभव को समझने योग्य बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि परिवार की चिंता और प्रोफेशनल फैसलों के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।

