मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हालात एक बार फिर गंभीर होते नजर आ रहे हैं। दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) के बावजूद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां कम होने के बजाय और तेज हो गई हैं। ताजा घटनाक्रम में US Navy ने ईरान के बंदरगाहों के आसपास अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Donald Trump के निर्देश पर अमेरिकी नौसेना ने मध्य पूर्व क्षेत्र में कम से कम 15 युद्धपोतों को तैनात किया है। इनमें प्रमुख विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln भी शामिल है, जो किसी भी बड़े सैन्य अभियान का केंद्र माना जाता है। इसके अलावा 11 अत्याधुनिक विध्वंसक जहाज भी इस बेड़े का हिस्सा हैं, जो समुद्री निगरानी और हमले की क्षमता रखते हैं।
अमेरिका का यह कदम उस समय सामने आया है, जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे से अधिक समय तक चली वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई। इस वार्ता का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाना था, लेकिन दोनों पक्ष किसी निर्णायक नतीजे पर नहीं पहुंच सके।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह नौसैनिक तैनाती “दबाव की रणनीति” का हिस्सा है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए तैयार नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो उसके खिलाफ और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई समुद्री स्वतंत्रता के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उसके हितों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है।
हालांकि दोनों देशों के बीच फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीन पर सैन्य तैयारियां यह दर्शाती हैं कि स्थिति कभी भी बदल सकती है।
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाते हैं या फिर हालात और बिगड़ते हैं।

