8 Aug 2026, Sat

दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में मिली कई खामियां, CAG ने की डेटा की नियमित जांच की सिफारिश

नई दिल्ली। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में एक बार फिर मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार 10.51 अरब डॉलर बढ़कर 692.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 6.12 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 682.35 अरब डॉलर पर था।

हालांकि यह स्तर अभी भी फरवरी 2026 में बने रिकॉर्ड स्तर से नीचे है। 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

आरबीआई के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) की होती है। 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में इन परिसंपत्तियों का मूल्य 8.75 अरब डॉलर बढ़कर 564.68 अरब डॉलर हो गया।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इन मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के कुल मूल्य पर पड़ता है।

गोल्ड रिजर्व का मूल्य भी बढ़ा

इस अवधि में भारत के स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) की वैल्यू में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड रिजर्व का मूल्य 1.68 अरब डॉलर बढ़कर 104.74 अरब डॉलर हो गया।

इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights – SDR) 4.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.67 अरब डॉलर पर पहुंच गए। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत का आरक्षित भंडार भी 2.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.78 अरब डॉलर हो गया।

पश्चिम एशिया संकट के दौरान घटा था भंडार

इस साल फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद भारतीय रुपये पर दबाव देखा गया था। उस समय अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी और विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ा।

रुपये को अत्यधिक कमजोर होने से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा था। आरबीआई ने डॉलर की बिक्री कर रुपये को स्थिर रखने की कोशिश की, जिसके कारण कई सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट दर्ज की गई थी।

विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के प्रयास रंग लाए

हाल के महीनों में सरकार और आरबीआई ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) जमा योजनाओं को प्रोत्साहन देने सहित कई उपाय शामिल हैं।

इन पहलों के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 32 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्रवाह प्राप्त हुआ है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को स्थिर बनाए रखने, आयात भुगतान क्षमता बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विदेशी मुद्रा भंडार में आई ताजा बढ़ोतरी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *