नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने लोगों के बीच प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। वायरल पोस्ट में एक सड़क किनारे भेलपुरी बेचने वाला दुकानदार बैंक स्टेटमेंट के पन्नों का इस्तेमाल भेलपुरी पैक करने के लिए करता नजर आ रहा है। मामला तब और गंभीर हो गया जब लोगों ने देखा कि उन कागजों पर किसी ग्राहक की निजी बैंकिंग जानकारी साफ दिखाई दे रही थी।
यह तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @Sudhanshu1414 नाम के हैंडल से शेयर की गई। पोस्ट शेयर करने वाले यूजर सुधांशु अम्भोरे ने लिखा कि उन्होंने एक स्ट्रीट वेंडर से 20 रुपये की भेल खरीदी, लेकिन जब उन्होंने पैकेजिंग देखी तो पता चला कि भेलपुरी बैंक स्टेटमेंट के दो पन्नों में लपेटकर दी गई थी।
यूजर के मुताबिक, उन दस्तावेजों में खाताधारक का नाम, बैंक खाता संख्या, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और अन्य संवेदनशील जानकारी साफ तौर पर दिखाई दे रही थी। पोस्ट में उन्होंने लिखा, “भारत में प्राइवेसी सचमुच मजाक बनकर रह गई है।”
यह तस्वीर सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इसे डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर मामला बताया। लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी व्यक्ति को धोखाधड़ी और साइबर अपराध का शिकार बना सकती है।
कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि आखिर इस तरह के निजी दस्तावेज सड़क किनारे दुकानदारों तक कैसे पहुंच रहे हैं। वहीं कई लोगों ने स्ट्रीट फूड पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कागजों की स्वच्छता पर भी चिंता जताई।
एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “सुना है मेडिकल रिपोर्ट्स भी इसी तरह इस्तेमाल होती हैं। शायद भेलपुरी वालों को RAW एजेंट बना देना चाहिए।” वहीं दूसरे यूजर ने दावा किया कि उन्हें भी इसी तरह कुछ दस्तावेजों में बैंक कर्मचारियों की सैलरी डिटेल्स तक मिल चुकी हैं।
हालांकि कुछ लोगों ने इस मामले पर तकनीकी जानकारी भी साझा की। एक यूजर ने बताया कि वायरल तस्वीर में दिख रहा बैंक स्टेटमेंट संभवतः मोबाइल बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए डाउनलोड किया गया पीडीएफ दस्तावेज था। उन्होंने कहा कि बैंक शाखाओं द्वारा जारी किए जाने वाले स्टेटमेंट आमतौर पर अलग फॉर्मेट में होते हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर लोगों को निजी दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की जरूरत का एहसास कराया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक स्टेटमेंट, आधार कार्ड की कॉपी, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य संवेदनशील दस्तावेजों को बिना नष्ट किए फेंकना साइबर धोखाधड़ी का कारण बन सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते और लेनदेन की जानकारी गलत हाथों में पहुंच जाए तो उसका इस्तेमाल फिशिंग, पहचान चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है।
वहीं सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने पूरे मामले को हल्के-फुल्के अंदाज में भी लिया। एक यूजर ने मजाक में लिखा कि “भेलपुरी से ज्यादा चिंता इस बात की है कि उसमें सिर्फ मुरमुरे और बिस्किट थे।”
फिलहाल यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग डेटा प्राइवेसी, साइबर सुरक्षा और स्ट्रीट फूड पैकेजिंग के मुद्दों पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं।

