बिहार में खनिज संपदा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के कई जिलों में दुर्लभ खनिज तत्वों और बहुमूल्य धातुओं के भंडार मिलने के संकेत मिले हैं। राज्य सरकार का दावा है कि आने वाले समय में बिहार देश के महत्वपूर्ण खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है। बिहार के खान एवं भू-तत्व मंत्री Pramod Kumar ने मंगलवार को जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में दुर्लभ खनिजों की पहचान की गई है और इनके व्यावसायिक खनन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
सबसे ज्यादा चर्चा जमुई जिले के सोनो क्षेत्र को लेकर हो रही है, जहां सोने के भंडार होने के संकेत मिले हैं। मंत्री ने बताया कि इलाके में सर्वेक्षण का काम जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि यहां बड़े स्तर पर सोने का भंडार मिलता है तो यह बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है।
सरकार के मुताबिक, बिहार के अलग-अलग हिस्सों में कई महत्वपूर्ण खनिजों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इनमें पैलेडियम, टाइटेनियम, ग्लॉकोनाइट, कोबाल्ट और अन्य दुर्लभ खनिज शामिल हैं। बांका जिले में कोबाल्ट के भंडार मिलने की पुष्टि हुई है और इसके खनन की दिशा में जल्द कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं भागलपुर जिले के बटेश्वरस्थान क्षेत्र में दुर्लभ मृदा तत्व यानी रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) के संकेत मिले हैं। इसके अलावा यहां क्रोमाइट भंडार की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स को आधुनिक तकनीक और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इनका उपयोग मिसाइल, रडार, लड़ाकू विमान, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में होता है। दुनियाभर में इन खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बिहार में इनके भंडार मिलने की खबर को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार ने बिहार में महत्वपूर्ण खनिजों के 14 ब्लॉक की पहचान की है। इनमें नवादा जिले में वैनाडियम युक्त मैग्नेटाइट और इल्मेनाइट के खनन ब्लॉक शामिल हैं। वहीं रोहतास जिले में ग्लॉकोनाइट के तीन ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। सरकारी कंपनी एमएसटीसी ने इन खदानों के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं और 20 मई के बाद नीलामी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
खनिज खोज के लिए राज्य के कई इलाकों में बड़े स्तर पर सर्वेक्षण कार्य चल रहा है। इसमें हवाई सर्वेक्षण, उपग्रह चित्रण, पुराने भूगर्भीय आंकड़ों का विश्लेषण और जमीनी अध्ययन शामिल हैं। खासकर झारखंड से सटे दक्षिणी बिहार के क्षेत्रों में खनिज खोज अभियान तेज कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बिहार में इन खनिजों का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होता है तो इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बिहार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।
फिलहाल राज्य सरकार और केंद्र सरकार की नजर अब सर्वेक्षण रिपोर्ट और नीलामी प्रक्रिया पर टिकी हुई है। जमुई में सोने के संभावित भंडार और अन्य दुर्लभ खनिजों की खोज ने बिहार में विकास की नई उम्मीदें जगा दी हैं।

