27 Apr 2026, Mon

‘बंदर पकड़ो, 600 रुपये पाओ’, महाराष्ट्र सरकार का अनोखा फैसला, अब वानरों पर लगेगा ‘प्राइस टैग’

महाराष्ट्र में ‘कैश फॉर कैच’ योजना पर विवाद: बंदर पकड़ने पर 600 रुपये इनाम, लोगों ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र में मानव और वानर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई नई योजना अब चर्चा और विवाद का विषय बन गई है। राज्य सरकार ने बढ़ते बंदर संकट से निपटने के लिए एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत बंदर पकड़ने पर 600 रुपये का इनाम दिया जाएगा। लेकिन इस फैसले ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकारी आदेश के अनुसार, शहरों और ग्रामीण इलाकों में बढ़ती रिझस मकाक और हनुमान लंगूर की संख्या को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। ये बंदर अक्सर घरों में घुसकर सामान नुकसान पहुंचाते हैं और राह चलते लोगों पर हमला भी कर देते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार की इस योजना के तहत बंदरों को जाल और पिंजरे की मदद से पकड़ा जाएगा। पकड़े गए हर बंदर की फोटो और रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इसके बाद इन वानरों को शहर से कम से कम 10 किलोमीटर दूर जंगलों में छोड़ा जाएगा। यह आदेश 22 अप्रैल को जारी किया गया है।

हालांकि, इस योजना पर सबसे बड़ा सवाल इनाम की राशि को लेकर उठ रहा है। आम लोगों का कहना है कि सिर्फ 600 रुपये के लिए कोई भी व्यक्ति अपनी जान जोखिम में क्यों डालेगा, क्योंकि बंदर पकड़ना बेहद खतरनाक काम है। कई बार बंदर आक्रामक हो जाते हैं और इंसानों पर हमला कर सकते हैं, जिससे गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस तरह की योजना से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनका मानना है कि अगर मानव-वानर संघर्ष को कम करना है तो इसके लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक उपाय अपनाने होंगे, न कि केवल बंदरों को पकड़कर दूर छोड़ देना।

इससे पहले भी राज्य में बंदरों से जुड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पिछले महीने येऊर जंगल में दो बंदरों के तीर लगने की घटना ने काफी हड़कंप मचा दिया था। इसके बाद वन विभाग ने जांच शुरू की थी और दोषियों की जानकारी देने पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

वन विभाग ने बताया था कि ऐसे मामलों की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत केस दर्ज किए गए हैं और जांच के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं।

फिलहाल, सरकार की इस नई योजना को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर प्रशासन इसे बढ़ते वानर संकट का समाधान बता रहा है, वहीं दूसरी ओर लोग इसकी व्यावहारिकता और सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि यह योजना जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है या फिर यह केवल एक विवादित फैसला बनकर रह जाती है।

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