पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बीजेपी उम्मीदवार हासिरानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 1,22,753 वोटों के भारी अंतर से पराजित किया। इस नतीजे ने नंदीग्राम की राजनीतिक अहमियत को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। चुनाव में वामपंथी दल की ओर से भी उम्मीदवार मैदान में था।
हासिरानी रथ को मिला बीजेपी का टिकट
नंदीग्राम उपचुनाव में बीजेपी ने हासिरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान चुनाव लड़ रहे थे। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शांतिगोपाल गिरि को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव के दौरान राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों और विभिन्न दलों के समर्थन को लेकर भी काफी चर्चा रही।
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राजनीतिक स्थिति में यह सीट बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा और कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया था। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार को बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट
नंदीग्राम विधानसभा सीट पहले शुभेंदु अधिकारी के पास थी। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी थी। इसके बाद उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। इसी कारण यहां उपचुनाव कराना पड़ा।
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से अहम स्थान रखता है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी यह सीट राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई थी, जब शुभेंदु अधिकारी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को यहां से हराया था। इस पृष्ठभूमि के कारण उपचुनाव के नतीजे पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की विशेष नजर थी।
चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद चर्चा में आया परिवार
हासिरानी रथ का नाम चुनाव के दौरान इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि वह चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ, शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक बताए जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 4 मई को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद परिवार और नंदीग्राम की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं।
हालांकि, चुनावी नतीजे को किसी एक घटना या मुद्दे से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। मतदाताओं के फैसले के पीछे स्थानीय परिस्थितियां, उम्मीदवारों की छवि, राजनीतिक समीकरण और अन्य मुद्दे भी भूमिका निभा सकते हैं।
नंदीग्राम के नतीजे पर टिकी राजनीतिक नजरें
इस उपचुनाव में जीत का अंतर काफी बड़ा रहा। बीजेपी के लिए यह परिणाम नंदीग्राम में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। वहीं, कांग्रेस और उसे मिले समर्थन के बावजूद आए नतीजे से विपक्षी दलों की रणनीति पर भी सवाल उठ सकते हैं।
फिलहाल इस जीत के व्यापक राजनीतिक प्रभाव का आकलन आगे की परिस्थितियों और राज्य में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा। नंदीग्राम का यह परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

