नई दिल्ली में शनिवार, 26 सितंबर को चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और फैसले किए गए। बैठक के बाद आयोग की ओर से बताया गया कि SIR से संबंधित बड़े फैसले पूरे आयोग की सहमति से लिए गए हैं। चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं।
बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दोनों चुनाव आयुक्त भी मौजूद रहे। आयोग ने SIR को लेकर प्रक्रिया को आसान बनाने और ऐसे मतदाताओं की परेशानी कम करने पर जोर दिया, जिन्हें रिकॉर्ड में मैपिंग नहीं होने या किसी तरह की तार्किक विसंगति के कारण नोटिस जारी किया गया है।
नोटिस पाने वालों के घर जाएंगे BLO
बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक, जिन मतदाताओं को SIR के दौरान unmapped या logical discrepancy के आधार पर नोटिस मिला है, उनके घर अब बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO जाएंगे। BLO संबंधित मतदाता से जरूरी दस्तावेज प्राप्त करेंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे।
इस व्यवस्था के तहत ऐसे मतदाताओं को सामान्य स्थिति में सुनवाई के लिए ERO या AERO कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी। केवल किसी विशेष परिस्थिति में, ERO के निर्णय के आधार पर सुनवाई की जा सकती है। ऐसी सुनवाई भी ऑनलाइन कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर मतदाता की ओर से परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हो सकेगा। इससे उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें कार्यालय जाकर प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो सकती है।
मजदूर और बेघर लोगों के लिए विशेष कैंप
आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर नागरिकों के लिए विशेष सहायता की व्यवस्था की जाए। इनके लिए हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाए जाएंगे, ताकि SIR की प्रक्रिया में किसी पात्र व्यक्ति को परेशानी न हो।
आयोग की ओर से पहले भी SIR के दौरान घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करने और फॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार BLO घर-घर जाकर फॉर्म के वितरण, संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं।
Form 6 और Declaration Form को लेकर स्थिति साफ
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि SIR के लिए Form 6 के साथ लगाए जाने वाले Declaration Form को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार व्यवस्था लागू रहेगी। वहीं, SIR की अवधि से बाहर के मामलों में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित पुराने फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।
इससे मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के बीच फॉर्म को लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति को कम करने की कोशिश की गई है।
ECINET की भी होगी समीक्षा
बैठक में ECINET को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। चुनाव आयोग के फील्ड अधिकारियों को ECINET पर उनकी भूमिका के अनुसार अलग-अलग स्तर का एक्सेस दिया गया है। अब इस डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी।
यह कमेटी वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में काम करेगी और इसमें IIT तथा IIIT से जुड़े स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। कमेटी यह देखेगी कि ECINET की व्यवस्था कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप काम कर रही है या नहीं।
आयोग के अनुसार, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की ओर से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में पहले ही कई सुधार किए जा चुके हैं। जरूरत पड़ने पर फील्ड अधिकारियों के लिए इसमें और सुविधाएं और लचीलापन जोड़ा जाएगा।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है। आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों में भी कहा गया है कि प्रक्रिया का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।

