उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में साइबर अपराध के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने फर्जी बीमा पॉलिसियों और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए लोगों से धोखाधड़ी करने वाले कथित गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह गिरोह अब तक 40 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
क्राइम ब्रांच और साइबर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इस मामले में क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, दो एटीएम या डेबिट कार्ड, दो चेकबुक, एक बैंक पासबुक और 3,000 रुपये नकद बरामद किए हैं।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी कथित तौर पर फर्जी बीमा पॉलिसियों के नाम पर लोगों को निशाना बनाते थे। इस गिरोह के खिलाफ विभिन्न स्थानों पर पहले से मामले दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब ठगी की पूरी रकम, पीड़ितों की संख्या और बैंक खातों के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
जेल में हुई मुलाकात के बाद शुरू किया ठगी का नेटवर्क
पुलिस की पूछताछ के अनुसार, गिरोह का कथित सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे बताया गया है। जानकारी के मुताबिक, उसकी मुलाकात राहुल नाम के आरोपी से गाजियाबाद की डासना जेल में हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने कथित तौर पर मिलकर साइबर ठगी का नेटवर्क शुरू किया।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी पहले दिल्ली के एक कॉल सेंटर में काम कर चुके थे। वहां काम करने के दौरान उन्होंने बीमा पॉलिसियों से संबंधित प्रक्रियाओं और ग्राहकों से बातचीत करने के तरीकों का अनुभव हासिल किया था। बाद में इसी अनुभव का इस्तेमाल लोगों को कथित रूप से धोखा देने के लिए किया गया।
Google Ads के जरिए लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस के मुताबिक, आरोपी फर्जी ईमेल आईडी बनाते थे और एक प्रतिष्ठित बीमा कंपनी के नाम से मिलते-जुलते ऑनलाइन विज्ञापन चलाकर ग्राहकों को आकर्षित करते थे। इन विज्ञापनों में दिए गए फोन नंबरों पर संपर्क करने वाले लोगों को बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण पर भारी छूट देने का लालच दिया जाता था।
जब ग्राहक बताए गए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते थे, तो आरोपी फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बीमा प्रमाणपत्र तैयार करके ईमेल के जरिए भेज देते थे। इस तरह ग्राहक को शुरुआत में लेनदेन वास्तविक होने का भ्रम हो सकता था।
कमीशन के बदले बैंक खातों का इस्तेमाल
पूछताछ में बैंक खातों के इस्तेमाल से जुड़ा एक और पहलू सामने आया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह से जुड़ा एक आरोपी कथित तौर पर कमीशन का लालच देकर अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाता था और उनकी जानकारी नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाता था। इसके बदले ठगी की रकम में से कमीशन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
ऑनलाइन बीमा खरीदते समय रहें सतर्क
यह मामला ऑनलाइन विज्ञापनों और सस्ते बीमा ऑफर के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने की जरूरत बताता है। किसी भी बीमा पॉलिसी का नवीनीकरण कराने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ग्राहक सेवा नंबर से जानकारी जरूर लें। विज्ञापन में दिए गए अनजान नंबरों पर आंख बंद करके भरोसा न करें और किसी भी व्यक्ति के कहने पर निजी जानकारी, बैंक विवरण या ओटीपी साझा न करें।
पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कदम उठाए जा सकते हैं।

