18 Jul 2026, Sat

परिसीमन बिल पर क्या होगा DMK का रुख? स्टालिन की बैठक में हो गया साफ, सांसदों को कांग्रेस से दूर रहने की हिदायत

चेन्नई/नई दिल्ली: संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने अपनी राजनीतिक रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में गुरुवार को पार्टी सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। स्टालिन ने लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया और आगामी सत्र में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर सांसदों को दिशा-निर्देश दिए। बैठक में कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें परिसीमन (Delimitation) से लेकर कावेरी जल विवाद, मेकेदाटु बांध और राज्य की स्वायत्तता जैसे मुद्दे शामिल रहे।

बैठक में पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह परिसीमन बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध जारी रखेगी। पार्टी का मानना है कि यदि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो दक्षिण भारतीय राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। DMK नेताओं ने कहा कि पार्टी केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले अंतिम विधेयक का इंतजार करेगी और उसमें शामिल प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद आगे की रणनीति तय करेगी।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह भी दोहराया गया कि तमिलनाडु के हितों से जुड़े सभी मुद्दों को संसद में मजबूती के साथ उठाया जाएगा। इनमें सबसे प्रमुख कावेरी नदी जल विवाद और मेकेदाटु बांध परियोजना शामिल हैं। DMK ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार कावेरी जल समझौते के अनुसार तमिलनाडु का हिस्सा नहीं छोड़ रही है, जिससे राज्य के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पार्टी ने कहा कि मेट्टूर बांध समय पर नहीं खुल पाने से खेती प्रभावित हुई है और हजारों किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

बैठक में पारित प्रस्ताव में मेकेदाटु बांध परियोजना का भी कड़ा विरोध किया गया। DMK ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस विवाद का समाधान निकालने के लिए एक स्वतंत्र न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) का गठन किया जाए, ताकि दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे का मुद्दा निष्पक्ष तरीके से सुलझाया जा सके।

इसके अलावा, पार्टी ने संसद के दोनों सदनों में संघवाद, राज्यों के अधिकार, संवैधानिक मूल्यों और राज्य की स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया। बैठक के बाद एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया पर कहा कि DMK का हर सांसद तमिलनाडु के लोगों की “आवाज और जमीर” बनकर संसद में अपनी भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले हर विधेयक का मूल्यांकन संविधान और राज्यों के अधिकारों के दृष्टिकोण से करेगी।

बैठक के दौरान राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, स्टालिन ने कांग्रेस के साथ संबंधों को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि चुनावों में DMK के सहयोग से जीत हासिल करने के बावजूद कांग्रेस ने राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी का साथ नहीं दिया। इसी कारण सांसदों को कांग्रेस से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले DMK की यह बैठक आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्पष्ट है कि पार्टी इस बार संसद में तमिलनाडु के हितों, संघीय ढांचे, कावेरी जल विवाद और परिसीमन जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। ऐसे में मॉनसून सत्र के दौरान इन विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

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