भारतीय सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता और दमदार खलनायक के रूप में अपनी खास पहचान बनाने वाले प्रदीप रावत को बुधवार को मुंबई में अंतिम विदाई दी गई। 74 वर्ष की उम्र में उनका निधन 4 अगस्त को हुआ था। वे लंबे समय से स्टेज-4 कैंसर से जूझ रहे थे। 5 अगस्त को गोरेगांव स्थित शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां परिवार, करीबी मित्रों, फिल्मी सितारों और प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रदीप रावत के अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। उनके बेटे विक्रमादित्य रावत ने पिता को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाईं। इस दौरान वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और रोते-बिलखते नजर आए। परिवार के अन्य सदस्य और करीबी लोग उन्हें सांत्वना देते हुए दिखाई दिए। अंतिम यात्रा में मौजूद लोगों की आंखें भी नम थीं और सभी ने दिवंगत अभिनेता को श्रद्धापूर्वक विदाई दी।
प्रदीप रावत के निधन की खबर से पूरे फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी। अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई प्रमुख कलाकार और फिल्म निर्माता शामिल हुए। अभिनेता आमिर खान, जिन्होंने फिल्म ‘लगान’ में उनके साथ काम किया था, उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। फिल्म निर्देशक आशुतोष गोवारिकर भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और प्रदीप रावत को याद करते हुए भावुक दिखाई दिए।
इसके अलावा वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद, निर्माता आनंद पंडित, अभिनेत्री रूहानिका धवन और अभिनेता यशपाल शर्मा भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। यशपाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर प्रदीप रावत के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें एक शानदार कलाकार और बेहतरीन इंसान बताया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की।
प्रदीप रावत ने अपने लंबे फिल्मी करियर में हिंदी, तमिल, तेलुगु और अन्य भाषाओं की फिल्मों में काम किया। उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘महाभारत’ से की थी। इसके बाद ‘लगान’ में ‘देवा’ के किरदार ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। हालांकि उन्हें सबसे बड़ी लोकप्रियता आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘गजनी’ से मिली, जिसमें उनके खलनायक के किरदार को दर्शकों ने खूब सराहा।
उनके निधन के बाद उनके पुराने इंटरव्यू भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें उन्होंने कैंसर से अपनी लड़ाई और जीवन के संघर्षों के बारे में खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि स्टेज-4 कैंसर का पता चलने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने परिवार को हमेशा सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। बजरंगबली में उनकी गहरी आस्था और मां के संस्कारों को वे अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते थे।
प्रदीप रावत का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने न केवल खलनायक के किरदारों को एक अलग ऊंचाई दी, बल्कि अपनी सादगी, अनुशासन और समर्पण से भी इंडस्ट्री में सम्मान हासिल किया। उनके अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि वे सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि अपने साथ काम करने वाले कलाकारों और दर्शकों के दिलों में खास स्थान रखने वाले इंसान भी थे।
फिल्म जगत के कई कलाकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनकी यादगार फिल्मों तथा अभिनय को भारतीय सिनेमा की अमूल्य धरोहर बताया।

