नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। इस बीच मृतकों की संख्या बढ़कर 469 तक पहुंच गई है। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि कई परिवार अपने परिजनों की तलाश में जुटे हुए हैं।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बाढ़ की पहली तबाही के बाद अब एक और खतरा मंडरा रहा है। नेपाल और चीन की सीमा के आसपास मलबे के कारण नदियों का बहाव बाधित होने से दो स्थानों पर झील जैसी स्थिति बन गई है। जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण इनके अचानक टूटने की आशंका जताई जा रही है। अगर इनमें से कोई झील फटती है तो निचले इलाकों में दोबारा तेज बाढ़ आ सकती है।
अगले तीन दिनों में फिर आ सकता है जलप्रलय
मलबे के कारण नदी का प्राकृतिक रास्ता रुकने से पानी एक जगह जमा हो रहा है। लगातार पानी बढ़ने के कारण दबाव भी बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में पानी का अचानक रास्ता बनाकर नीचे की ओर बहना बेहद खतरनाक हो सकता है।
सीमा के ऊपरी हिस्से में बनी रुकावट को देखते हुए दूसरी बाढ़ के खतरे को गंभीर माना जा रहा है। यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसी वजह से नदी किनारे रहने वाले लोगों और प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
नदी किनारे जाने से बचने की अपील
प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से नदी के किनारों और जोखिम वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है। यात्रियों और राहत एवं बचाव अभियान में शामिल कर्मचारियों को भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। खासतौर पर उन इलाकों में खतरा अधिक है, जहां पहले ही बाढ़ और मलबे से भारी नुकसान हो चुका है।
30 देशों के लोग भी लापता
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार करीब 30 देशों के नागरिकों के लापता होने की खबर सामने आई है। अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
बाढ़ का पानी और मलबा कई इलाकों में दूर तक फैल गया है। इस कारण राहत दलों के लिए प्रभावित स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कई सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव कार्य में अतिरिक्त समय लग रहा है।
शवों की बरामदगी भी जारी
बाढ़ के बाद विभिन्न स्थानों से शव मिलने का सिलसिला जारी है। बड़ी संख्या में शव बरामद होने के बाद उन्हें सुरक्षित रखना और उनकी पहचान करना भी प्रशासन के सामने चुनौती बन गया है। कई शव पानी और मलबे में लंबे समय तक रहने के कारण खराब स्थिति में मिले हैं।
प्रशासन की कोशिश है कि शवों की पहचान से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड और साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं, ताकि लापता लोगों के परिवारों को अपने परिजनों के बारे में जानकारी मिल सके।
राहत अभियान के बीच बढ़ी चिंता
नेपाल इस समय एक साथ कई चुनौतियों से जूझ रहा है। एक तरफ बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी, दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाने का काम चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ संभावित दूसरी बाढ़ का खतरा राहत कार्यों को और मुश्किल बना सकता है।
अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। प्रशासन और बचाव दल संभावित खतरे वाले इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

