31 Oct 2026, Sat
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नेपाल तबाही में मरने वालों का आंकड़ा 1355 पहुंचा, आज राष्ट्रीय शोक दिवस पर रहेगा सार्वजनिक अवकाश

काठमांडू, 7 सितंबर: नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और उससे हुई भारी तबाही के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है। प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा है। इस त्रासदी के बीच नेपाल सरकार ने सोमवार, 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने का फैसला किया है। इस अवसर पर देशभर में सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है।

जगह-जगह आयोजित हुईं श्रद्धांजलि सभाएं

बीते 26 अगस्त को तिब्बत के समीप रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और दूसरी जरूरी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। आपदा के बाद से ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी है।

इस प्राकृतिक त्रासदी में अब तक 1355 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 5000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट पैदा हो गया है।

आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की याद में नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। बिहार-नेपाल सीमा के पास बीरगंज में भी लोगों ने एकत्र होकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनकी आत्मा की शांति के लिए दीप प्रज्वलित किए।

सरकारी कार्यालयों में आधा झुका रहेगा राष्ट्रीय ध्वज

राष्ट्रीय शोक दिवस के दौरान नेपाल में सरकारी कार्यालयों और विदेशों में स्थित नेपाली राजनयिक मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। सरकार का यह फैसला आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त करने के उद्देश्य से लिया गया है।

नेपाल में इस आपदा को 13 दिन पूरे होने के बाद यह शोक दिवस मनाया जा रहा है। हिंदू परंपरा में मृत्यु के 13वें दिन को शोक अवधि के महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से भी इस दिन का विशेष भावनात्मक महत्व माना जा रहा है।

खोज और बचाव अभियान जारी

बाढ़ के कारण केवल जनहानि ही नहीं हुई, बल्कि बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। कई घरों के अलावा सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कुछ स्थानों पर सुरंगों और अन्य संरचनाओं में फंसे लोगों की तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों और बचाव दलों की टीमें लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राहत और बचाव अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

32 हजार परिवार प्रभावित

आपदा से कम से कम 32 हजार परिवारों के विस्थापित होने की जानकारी है। वहीं करीब 7500 मकान पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। बाढ़ ने लोगों की आजीविका को भी प्रभावित किया है और कई परिवारों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

सरकार और राहत एजेंसियों के सामने अब प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान, भोजन, जरूरी सामान और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती है। राष्ट्रीय शोक दिवस के जरिए पूरा देश इस भीषण आपदा में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देगा।

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